
कमल मिश्रा
एआई का विकास आशा और चुनौती दोनों का संकेत : डॉ चिन्मय पण्ड्या
नई दिल्ली/हरिद्वार 20 फरवरी।

हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय, इंडिया एआई मिशन भारत सरकार तथा इंटर पार्लियामेंट्री यूनियन (आईपीयू), स्विट्जरलैण्ड के संयुक्त तत्त्वावधान में नई दिल्ली के भारत मंडपम में एआई फॉर डेमोक्रेसी विषय पर अंतरराष्ट्रीय समिट का आयोजन किया गया। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब मीडिया, उद्योग, फिल्म और सरकारी-गैरसरकारी संस्थानों सहित विभिन्न क्षेत्रों में एआई की पहुंच तेजी से बढ़ रही है। एआई के उपयोग और उससे जुड़ी सावधानियों पर अखिल विश्व गायत्री परिवार, इंडिया एआई मिशन भारत सरकार और वैश्विक संस्थानों द्वारा मंथन किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि यह डेमोक्रेसी पर एकमात्र तथा विश्व का पहला समिट था।
भारत मण्डपम में आयोजित इस समिट में लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आज शासन, शिक्षा नीति और अन्य क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। उनका मानना है कि एआई के माध्यम से भारत की संस्कृति, नैतिक मूल्य और आध्यात्मिक धरोहर को पूरी दुनिया में प्रसारित करने में सहयोग मिलेगा। बिरला ने कहा कि इस नई तकनीकी पद्धति से लोकतांत्रिक संस्थाओं के साथ सार्थक संवाद स्थापित किया जा सकता है। इससे उत्तरदायी संस्थाएँ और नैतिक मूल्यों वाले जनप्रतिनिधि देश के विकास में अधिक प्रभावशाली योगदान दे सकेंगे। उन्होंने कहा कि भारत एक विविधताओं से भरा देश है, इसलिए एआई का प्रयोग जवाबदेही और नैतिकता के साथ होना चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में नैतिक शिक्षा, आध्यात्मिक ज्ञान और योग के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी शिक्षा का अद्भुत समन्वय किया गया है, जो एक नैतिक और सक्षम राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इससे पूर्व समिट की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए साउथ एशियन इंस्टीट्यूट फॉर पीस एंड रिकॉन्सिलिएशन (एसएआईपीआर) के अध्यक्ष एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में तेजी से एक वैश्विक स्तर पर अग्रणी देश के रूप में उभर रहा है। भारत द्वारा डिजिटल नवाचार और डेटा-संचालित शासन को बढ़ावा देने के प्रयासों ने एआई को सार्वजनिक नीति और सेवा वितरण के केंद्र में ला दिया है। यह विकास आशा और चुनौती दोनों का संकेत देता है। उन्होंने कहा कि एआई शासन को अधिक पारदर्शी, कुशल और उत्तरदायी बनाने की क्षमता रखता है। इसके माध्यम से संसाधनों का बेहतर आवंटन, योजनाओं की निगरानी और निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया को सशक्त बनाया जा सकता है। स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित समाधान नागरिकों तक सेवाओं की पहुंच को तेज और प्रभावी बना सकते हैं। हालांकि लोकतंत्र केवल तकनीकी दक्षता पर आधारित प्रणाली नहीं है। यह सहभागिता, विश्वास, समानता और पारदर्शिता जैसे मानवीय मूल्यों पर टिका है। उन्होंने गीता सहित विभिन्न आर्षगं्रथों का जिक्र करते हुए कहा कि एआई का उपयोग करते समय डेटा गोपनीयता, एल्गोरिदमऔर जवाबदेही जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
इस दौरान आईपीयू के महासचिव श्री मार्टिन चुंगोंग, मैक्सिको की एआई नैतिकता विशेषज्ञ और ह्यूमन फाउंडेशन की अध्यक्ष सुश्री जिमेना सोफिया विवेरोस, हंगरी संसद के उपाध्यक्ष श्री लाजोस ओलाह सहित अनेक एआई विशेषज्ञों ने भी ने नैतिक एआई, मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती पर बल दिया। इस दौरान अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं एसएआईपीआर के अध्यक्ष डॉ पण्ड्या ने अतिथियों को देसंविवि के प्रतीक चिह्न, युगसाहित्य आदि भेंटकर सम्म्मानित किया। इस अवसर पर भारत, हंगरी, उत्तरीय अमेरिका आदि देशों के एआई विशेष सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।



