अली अहमद काजमी ने सात साल की उम्र में रखा पहला रोजा,माता-पिता सहित परिचितों ने दी बधाई

इमरान देशभक्त वरिष्ठ पत्रकार
रुड़की।पवित्र माह रमजान के पहले अशरा,जो रहमतों का पखवाड़ा कहलाता है में रोजेदार तरावीह और विशेष नमाज अदा करने में लगे हैं।इस पखवाड़े में पहली बार रोजा रखने वालों का सिलसिला शुरू हो गया है।मंगलौर मोहल्ला किला निवासी शमीम काजमी के सात वर्षीय नवासे अली अहमद काजमी ने पहला रोजा रखा।इस पहले रोजे की खास बात ये रही कि अली अहमद काजमी के साथ पढ़ने वाले उसके मुस्लिम सहपाठी भी शामिल हुए,उनमें कुछ हिन्दू नन्हे सहपाठी भी इस खुशी में शामिल रहे।सबने मिलकर इन यादगार पलों का लुत्फ उठाया।अली अहमद काजमी के इन मित्रों का कहना था कि अली अहमद काजमी हमारे हर पर्व में मिलकर खुशी मनाता है।अली अहमद काजमी के पिता फुजैल काजमी और माता एडवोकेट मारिया काजमी का मानना है कि हमें अपने बच्चों में अपने-अपने धार्मिक संस्कार बचपन से ही पैदा करने चाहिए,चाहे वे किसी भी धर्म के हों,क्योंकि इससे उनमें राष्ट्रीयता और मानवता का भाव पैदा होता है।उन्होंने कहा कि नन्हें बालक फरिश्तों के समान होते हैं।इस अवसर पर काजी जमाल काजमी,अताए साबिर,अनिल शर्मा,नज्म काजमी,उमर,अहम हुसैन आदि मौजूद रहे।



