राजकीय महाविद्यालय चिन्यालीसौड़ में बौद्धिक संपदा अधिकार विषयक व्याख्यानमाला के अंतर्गत चतुर्थ व्याख्यान आयोजित

उत्तराखंड उवाच ब्यूरो

चिन्यालीसौड़, 25 मार्च 2026। राजकीय महाविद्यालय चिन्यालीसौड़ में यूकास्ट, उत्तराखंड द्वारा प्रायोजित बौद्धिक संपदा अधिकार विषयक व्याख्यानमाला के अंतर्गत चतुर्थ व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर प्रभात द्विवेदी जी ने की। कार्यक्रम हाइब्रिड मोड में संचालित किया गया।
कार्यक्रम में ऑनलाइन रूप से जुड़े़ मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व निदेशक, उच्च शिक्षा विभाग, उत्तराखंड, प्रो० कमल किशोर पांडे जी ने “उच्च शिक्षा में आईपीआर की आवश्यकता” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में ज्ञान और नवाचार ही किसी भी राष्ट्र की वास्तविक पूंजी बन चुके हैं, और ऐसे में बौद्धिक संपदा अधिकारों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में होने वाले शोध, प्रोजेक्ट, नवाचार एवं स्टार्टअप गतिविधियों को उचित कानूनी सुरक्षा प्रदान करना समय की मांग है।प्रोफेसर पांडे ने यह भी बताया कि आईपीआर न केवल शोधकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि उन्हें नवीन आविष्कारों और खोजों के लिए प्रेरित भी करता है। उन्होंने आईपीआर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से लेकर वर्तमान तक की विकास यात्रा के साथ-साथ पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और डिजाइन जैसे विभिन्न आईपीआर घटकों के परिचय पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों में आईपीआर सेल की स्थापना एवं जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित न रहें, बल्कि नवाचार, रिसर्च और उद्यमिता की दिशा में भी कार्य करें तथा अपने विचारों को संरक्षित कर उन्हें समाज और अर्थव्यवस्था के विकास में योगदान देने हेतु उपयोग में लाएं।
कार्यक्रम अध्यक्ष एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर प्रभात द्विवेदी जी ने अपने संबोधन में मुख्य वक्ता प्रो० कमल किशोर पांडे जी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार आज के ज्ञान-आधारित समाज की आधारशिला है। अतः आज के डिजिटल युग में विद्यार्थियों को अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने तथा अपनी बौद्धिक संपदा के संरक्षण के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है।
द्वितीय वक्ता के रूप में महाविद्यालय के वाणिज्य विभाग की प्राध्यापिका डॉ० सुगन्धा वर्मा ने “बौद्धिक संपदा अधिकारों का अनुपालन एवं कर्मशलाइजेशन” विषय पर पीपीटी के द्वारा अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि केवल बौद्धिक संपदा का सृजन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका विधिक संरक्षण, सही अनुपालन तथा व्यावसायिक उपयोग भी अत्यंत आवश्यक है।
महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक एवं मुख्य मुख्य शास्त्ता डॉ किशोर सिंह चौहान ने भी विद्यार्थियों से नवाचार के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।
अंत में महाविद्यालय के आईपीआर प्रकोष्ठ के प्रभारी एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ अशोक कुमार अग्रवाल ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया।
कार्यक्रम में मंच संचालन डॉ. सुगंधा वर्मा ने किया। तकनीकी सहयोग डॉ बृजेश चौहान, डॉ भूपेश चन्द्र पंत एवं डॉ आलोक बिजल्वाण ने दिया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। साथ ही महाविद्यालय से डॉ रजनी चमोली, डॉ विनीत कुमार, डॉ खुशपाल, डॉ यशवंत सिंह, डॉ निशि दुबे, डॉ प्रभात कुमार सिंह, डॉ आराधना राठौर, डॉ मंजू पांडे, डॉ प्रभदीप सिंह, डॉ कुलवीर सिंह राणा, राजेश राणा, स्वर्ण सिंह, मदन सिंह, रोशन लाल, होशियार सिंह, जय प्रकाश भट्ट, सुनील गैरोला, अमीर सिंह चौहान, सुनील रमोला, नरेश रमोला, कौशल सिंह बिष्ट, धनराज सिंह बिष्ट, हिमानी रमोला, विजय लक्ष्मी, संजय कुमार एवं रमेश चंद्र भी उपस्थित रहे।



