विश्व के युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का आकर्षण
37 देशों के 134 सदस्यीय दल ने किया परिसर भ्रमण, योग-यज्ञ आधारित शोध कार्यों को जाना

कमल मिश्रा
हरिद्वार 16 मार्च। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में सोमवार को 37 देशों के 134 सदस्यों का अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल शैक्षणिक भ्रमण के लिए पहुँचा। इस प्रतिनिधिमंडल में 124 युवा प्रतिभागियों के साथ विभिन्न देशों के प्रोफेसर और शिक्षाविद शामिल थे। विश्वविद्यालय पहुँचने पर अतिथियों का पारंपरिक स्वागत किया गया। भ्रमण के दौरान मेहमानों ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक नवाचार, अनुसंधान कार्यों और आध्यात्मिक वातावरण की सराहना की।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का भारत सहित 20 से अधिक देशों के सौ से अधिक शैक्षणिक संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग और अनुबंध हैं। इन अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक संबंधों को मजबूत बनाने में विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या की महत्वपूर्ण भूमिका है। उनके प्रयासों से ही विश्वविद्यालय में समय-समय पर विभिन्न देशों के विद्यार्थी और शिक्षाविद अध्ययन एवं शोध के लिए आते रहते हैं।
प्रतिनिधिमंडल में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, जर्मनी, कनाडा, सीरिया, यूक्रेन, उज़्बेकिस्तान, जापान, रोमानिया, ईरान सहित 37 देशों के प्रतिभागी शामिल थे। विश्वविद्यालय परिसर के भ्रमण के दौरान अतिथियों ने स्वावलंबन प्रकल्प, एशिया के प्रथम बाल्टिक सेंटर, सृजना, योग केंद्र तथा अन्य विभिन्न शैक्षणिक और शोध इकाइयों का अवलोकन किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने उन्हें इन प्रकल्पों की कार्यप्रणाली, उद्देश्य और उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। युवाओं ने यज्ञोपैथी विभाग का भी दौरा किया, जहाँ यज्ञ चिकित्सा से जुड़े अनुसंधानों और प्रयोगों के बारे में जानकारी प्राप्त की। विदेशी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने इस अनूठी पद्धति में विशेष रुचि दिखाई और इसके वैज्ञानिक तथा आध्यात्मिक पहलुओं के बारे में प्रश्न भी किए।
इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या से भेंट की। उन्होंने युवाओं को भारतीय संस्कृति, वैज्ञानिक अध्यात्म, नैतिक मूल्यों और सकारात्मक जीवन दृष्टि के महत्व पर अपने विचार साझा किए। इस दौरान विभिन्न देशों से आए युवाओं ने अपनी जिज्ञासाएँ और प्रश्न रखे, जिनका समाधान प्रतिकुलपति द्वारा किया गया।
अंत में विश्वविद्यालय की ओर से सभी अतिथियों को युग साहित्य, गायत्री महामंत्र अंकित चादर तथा विश्वविद्यालय का प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने इस शैक्षणिक और सांस्कृतिक अनुभव को प्रेरणादायी बताते हुए विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की।




