RuTAG 2.0 की वार्षिक समीक्षा बैठक आईआईटी रुड़की में, ग्रामीण प्रौद्योगिकियों को प्रयोगशाला से जमीनी स्तर तक पहुंचाने पर केंद्रित
RuTAG 2.0 में प्रयोगशाला अनुसंधान से जमीनी स्तर पर अपनाए जाने तक के संक्रमण को मजबूत करने पर विचार-विमर्श
रुड़की, उत्तराखंड, 24 सितंबर 2026: ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्य समूह (RuTAG 2.0) की तीसरी वार्षिक समीक्षा बैठक आज भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) में शुरू हुई और यह बैठक 24–25 सितंबर 2026 को आयोजित की जा रही है। बैठक में प्रमुख आईआईटी एवं वैज्ञानिक संस्थानों के शोधकर्ता, वैज्ञानिक और अधिकारी एकत्रित हुए हैं, ताकि RuTAG 2.0 के अंतर्गत विकसित की जा रही तकनीकी पहलों की प्रगति की समीक्षा की जा सके, जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की जा सके तथा टिकाऊ और व्यापक स्तर पर अपनाई जा सकने वाली ग्रामीण प्रौद्योगिकियों के लिए रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया जा सके।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रो. अजय कुमार सूद, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) ने की। इस अवसर पर डॉ. परविंदर मैनई, वैज्ञानिक सचिव, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय; प्रो. कमल किशोर पंत, निदेशक, आईआईटी रुड़की; प्रो. विवेक मलिक, डीन (SRIC), आईआईटी रुड़की; तथा प्रो. एस. के. सिंगल, PI, RuTAG आईआईटी रुड़की उपस्थित रहे।
आईआईटी मद्रास, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी रुड़की, आईआईटी गुवाहाटी, ICAR-NAARM हैदराबाद और SKUAST कश्मीर स्थित RuTAG केंद्रों के प्रतिनिधि परियोजनाओं की प्रगति का आकलन करने, जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करने तथा टिकाऊ और व्यापक स्तर पर अपनाई जा सकने वाली ग्रामीण प्रौद्योगिकियों के लिए रणनीतियां तैयार करने हेतु बैठक में भाग ले रहे हैं।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रो. अजय कुमार सूद, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, ने कहा कि ग्रामीण प्रौद्योगिकियों को वैज्ञानिक नवाचार से आगे बढ़कर व्यावहारिकता, वहनीयता, अनुकूलनशीलता और व्यापक स्तर पर अपनाए जाने की क्षमता प्रदर्शित करनी चाहिए, ताकि जमीनी स्तर पर सार्थक प्रभाव उत्पन्न किया जा सके। उन्होंने प्रयोगशालाओं में किए जा रहे उच्च स्तरीय अनुसंधान को ग्रामीण समुदायों, घरों, कृषि क्षेत्रों और अन्य जमीनी अनुप्रयोगों के लिए व्यावहारिक समाधानों में परिवर्तित करने में RuTAG की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने ग्रामीण प्रौद्योगिकियों को व्यापक स्तर पर अपनाने के लिए जमीनी स्तर पर तैनाती को मजबूत करने, सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने, क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों का समाधान करने तथा आत्मनिर्भर स्थानीय उद्यम मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
प्रो. अजय कुमार सूद ने कहा, “ग्रामीण प्रौद्योगिकी का वास्तविक प्रभाव इस बात में निहित है कि वह प्रयोगशाला से आगे बढ़कर वास्तविक जरूरतों का प्रभावी ढंग से समाधान कर सके। RuTAG के अंतर्गत विकसित प्रौद्योगिकियां व्यावहारिक, वहनीय, अनुकूलनशील और व्यापक स्तर पर अपनाए जाने योग्य होनी चाहिए, ताकि वे जमीनी स्तर पर स्थायी प्रभाव उत्पन्न कर सकें। इन समाधानों को ग्रामीण समुदायों के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने के लिए जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन, सामुदायिक सहभागिता और स्थानीय उद्यम मॉडल को मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा।”
डॉ. परविंदर मैनई, वैज्ञानिक सचिव, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय, ने RuTAG 2.0 के अंतर्गत शैक्षणिक अनुसंधान, तकनीकी विकास और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के बीच निर्बाध और परिणामोन्मुखी जुड़ाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक नवाचार की सफलता उसके प्रभावी अंगीकरण, निरंतर उपयोग और अंतिम उपयोगकर्ताओं पर पड़ने वाले ठोस प्रभाव में परिलक्षित होनी चाहिए। उन्होंने ग्रामीण कारीगरों, किसानों और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करते हुए निरंतर फीडबैक तंत्र के महत्व को भी रेखांकित किया। साथ ही, उन्होंने मानकीकृत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रोटोकॉल, प्रभावी प्रसार तंत्र तथा RuTAG केंद्रों और साझेदार संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रो. कमल किशोर पंत, निदेशक, आईआईटी रुड़की, ने जोर दिया कि तकनीकी नवाचार किसानों, कारीगरों और ग्रामीण समुदायों की वास्तविक आवश्यकताओं को संबोधित करने वाला होना चाहिए तथा इसमें विश्वसनीयता, उत्पादकता, वहनीयता और अनुकूलनशीलता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने प्रभावी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, व्यापक प्रसार और दीर्घकालिक अंगीकरण के लिए शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी एजेंसियों, उद्योगों, गैर-सरकारी संगठनों और ग्रामीण संगठनों के बीच सहयोग के महत्व पर बल दिया। प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा, “प्रौद्योगिकी तब वास्तव में प्रभावशाली बनती है जब वह किसानों, कारीगरों और ग्रामीण समुदायों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप हो। RuTAG शैक्षणिक अनुसंधान को जमीनी वास्तविकताओं से जोड़ने तथा संस्थानों, सरकार, उद्योग और ग्रामीण संगठनों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। विश्वसनीय, वहनीय और अनुकूलनशील प्रौद्योगिकियों के प्रभावी हस्तांतरण, व्यापक प्रसार और दीर्घकालिक अंगीकरण के लिए ऐसे सहयोग आवश्यक हैं।”
डॉ. राकेश कौर, सलाहकार/वैज्ञानिक ‘जी’, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय, ने ग्रामीण समुदायों के सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान में प्रौद्योगिकी-आधारित हस्तक्षेपों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने जमीनी स्तर पर अनुप्रयोगों के लिए विकसित प्रौद्योगिकियों को बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले मानकीकृत, पूर्ण रूप से सत्यापित तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप बनाए जाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
पहले दिन की चर्चाओं में अनुसंधान और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के बीच संबंध को मजबूत करने, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और प्रसार तंत्र में सुधार करने तथा यह सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया कि ग्रामीण समुदायों के लिए विकसित प्रौद्योगिकियां स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप हों और उन्हें टिकाऊ रूप से अपनाया जा सके।
दो दिवसीय समीक्षा बैठक 25 सितंबर 2026 को भी जारी रहेगी, जिसमें RuTAG परियोजनाओं की प्रगति, जमीनी स्तर पर अंगीकरण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, प्रसार तंत्र तथा ग्रामीण प्रौद्योगिकियों के टिकाऊ क्रियान्वयन की रणनीतियों पर आगे विचार-विमर्श किया जाएगा। भाग लेने वाले RuTAG केंद्र सहयोग को मजबूत करने तथा ग्रामीण प्रौद्योगिकियों को व्यापक स्तर पर अपनाने और देश में प्रौद्योगिकी-आधारित ग्रामीण परिवर्तन के लिए एक कार्यान्वयन योग्य रोडमैप तैयार करने पर भी विचार-विमर्श करेंगे।




