स्वस्थ हृदय के लिए शरीर, मन और आत्मा का संतुलन आवश्यक-डा.संजय शाह

कमल मिश्रा
हरिद्वार। स्वामी रामप्रकाश चैरिटेबल अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डा.संजय शाह ने कहा कि प्रदूषण,अनहेल्दी खानपान,फिजिकल एक्टिविटी की कमी और स्ट्रेसफुल लाइफस्टाइल ने सेहत को गंभीर खतरे में डाल दिया है।खासकर युवाओं में दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। हार्ट अटैक,स्ट्रोक और हार्ट फेलियर जैसी समस्याएं लाखों जिंदगियां छीन रही हैं। हृदय को स्वस्थ रखने के लिए केवल दवा नही,बल्कि जीवनशैली में परिवर्तन के साथ ही शरीर,मन और आत्मा तीनों का संतुलन आवश्यक है।विश्व हृदय दिवस की पूर्व संध्या पर डा.संजय शाह ने कहा कि विश्व हृदय दिवस मनाने का मुख्य मकसद दिल की बीमारियों के बारे में जानकारी देना और स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करना है।उन्होंने कहा कि हृदय रोग होने की स्थिति में उपचार के साथ जीवनशैली मे सुधार भी आवश्यक है।उन्होंने कहा कि स्वस्थ हृदय के लिए शरीर,मन और आत्मा का संतुलन आवश्यक है।योग केवल व्यायाम नहीं,बल्कि यह शरीर,मन और आत्मा का विज्ञान है।
अनुलोम विलोम से रक्तचाप संतुलित होता है। कपालभाति से फेफड़े शुद्ध होते हैं और रक्त में ऑक्सीजन बढ़ती है।ध्यान करने से पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय होता है,जो हृदय को शांति और स्थिरता देता है।सुबह सूर्य उदय के साथ उठना,नंगे पैर हरी घास पर चलना,सूर्य की हल्की धूप लेना,समय पर भोजन और पर्याप्त नींद लेना आदि को अपनाने से हृदय रोग के साथ अन्य कई बीमारियों में भी लाभ मिलता है।



