ऋषिकेश

अनुमान समिति के अध्ययन दौरे के अंतर्गत माननीय सांसदों का परमार्थ निकेतन आगमन

विश्व विख्यात परमार्थ गंगा आरती में माननीय सांसदों की गरिमामयी उपस्थिति, पूज्य स्वामी  ने माननीय सांसदों को रूद्राक्ष का पौधा भेंट कर हरित विकास का कराया संकल्प

 

पूज्य स्वामी  ने माननीय सांसदों को रूद्राक्ष का पौधा भेंट कर हरित विकास का कराया संकल्प

ऋषिकेश, 29 सितम्बर 2026। भारत की संसद की अनुमान समिति (कमिटी ऑन एस्टिमेट्स) के माननीय अध्यक्ष एवं सदस्यगण तथा भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारीगण एवं  सांसद एम. के. राघवन,  प्रतिमा मंडल ,  चंदन चौहान , जॉइंट सेक्रेटरी जूबी अमर, अंडर सेक्रेटरी, शीतल कपूर ,  सुमति शर्मा , एचआर, बीएचईएल के प्रतिनिधिगण…पांच दिवसीय उत्तराखंड अध्ययन दौरे के अंतर्गत ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन पहुँचे। माँ गंगा के पावन तट पर स्थित परमार्थ निकेतन में माननीय सांसदों का अभिनन्दन भारतीय संस्कृति, सनातन परम्परा और आध्यात्मिक चेतना की गरिमामयी भावना के साथ किया।

इस अवसर पर माननीय सांसदों ने परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में विश्व विख्यात परमार्थ गंगा आरती एवं यज्ञ में सहभाग किया।

परमार्थ निकेतन की गंगा आरती एक दिव्य धार्मिक अनुष्ठान है, जो प्रकृति, संस्कृति और मानवता के बीच सामंजस्य का संदेश देने वाली एक जीवंत परम्परा है। आरती के माध्यम से पूज्य स्वामी जी संदेश देते है नदियाँ केवल जल की धाराएँ नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति, आस्था और जीवन की आधारशिला हैं।

माननीय सांसदों ने परमार्थ निकेतन की आध्यात्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों, योग, पर्यावरण संरक्षण, गंगा संरक्षण तथा भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन से जुड़े विभिन्न प्रयासों की जानकारी भी प्राप्त की।

इस अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती  ने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी भौतिक उपलब्धियों के साथ-साथ उसकी संस्कृति, संस्कार, आध्यात्मिक विरासत और प्रकृति के प्रति श्रद्धा में निहित है। हमारी विकास यात्रा तभी सार्थक हो सकती है, जब विकास के साथ हमारी नदियाँ, पर्यावरण, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियाँ भी सुरक्षित रहें।

उन्होंने कहा कि मां गंगा भारत की जीवनधारा ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना की धारा भी हैं। हिमालय से सागर तक बहती माँ गंगा भारत की एकता, आस्था और विरासत को जोड़ती हैं। गंगा के प्रति श्रद्धा को स्वच्छता, संरक्षण और संवर्धन के संकल्प में परिवर्तित करना आज समय की आवश्यकता है।

डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती जी ने भी माननीय सांसदों के साथ समसामयिक विषयों पर संवाद करते हुए भारतीय ज्ञान परम्परा, योग, पर्यावरण चेतना, नदी संरक्षण तथा वैश्विक स्तर पर भारत की आध्यात्मिक विरासत की भूमिका पर विचार साझा किए।

आज जब विश्व पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, मानसिक तनाव और सतत विकास जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब भारत की प्राचीन जीवन-दृष्टि और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन का संदेश अत्यंत प्रासंगिक है।

माननीय सांसदों और पूज्य स्वामी जी के बीच हुए संवाद में विकास और विरासत, पर्यावरण संरक्षण, नदियों का महत्व, भारतीय संस्कृति एवं संस्कार, आध्यात्मिक पर्यटन, योग तथा प्रकृति के संरक्षण जैसे समसामयिक विषयों पर भी चर्चा हुई।

अनुमान समिति का यह अध्ययन दौरा विभिन्न संस्थानों की कार्यप्रणाली, व्यवस्थाओं, गतिविधियों एवं विकास से जुड़े पहलुओं के प्रत्यक्ष अध्ययन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड की यात्रा के दौरान परमार्थ निकेतन का यह प्रवास भारतीय संस्कृति और आधुनिक विकास के बीच संवाद का भी एक सुंदर अवसर बना।

माँ गंगा की धारा की तरह भारत की संस्कृति भी अनादि काल से निरंतर प्रवाहित है, और यही प्रवाह भारत की पहचान, चेतना और विश्व को देने वाले संदेश का आधार है।

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