माता भगवती देवी की 100वीं जन्म जयंती के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ

कमल मिश्रा
हरिद्वार 29 सितंबर।
गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में मंगलवार को माता भगवती देवी शर्मा जी की 100वीं जन्म जयंती के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। प्रातः से ही शांतिकुंज में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे गायत्री साधकों की गतिविधियां शुरू हो गईं। हजारों साधकों ने सामूहिक ध्यान-साधना में भाग लिया। इसके बाद हवन में शामिल होकर आहुतियां दीं और गायत्री मंत्र का सामूहिक जप किया। हजारों पीतवस्त्रधारी साधकों के सामूहिक उद्घोष ‘हम बदलेंगे-युग बदलेगा’ से पूरा परिसर गूंज उठा।
इस दौरान आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ जन्मशताब्दी वर्ष के उद्देश्यों पर भी चर्चा हुई। माताजी के जीवन से जुड़े प्रमुख पक्षों, नारी जागरण, संस्कार निर्माण, सेवा और साधना को कार्यक्रम को केन्द्र में रखा गया। शांतिकुंज परिसर में जुटे साधकों ने उनके जीवन और विचारों को स्मरण करते हुए इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
इस दौरान अपने संदेश में संस्था की अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैलदीदी ने कहा कि माताजी ने अपने जीवन के प्रत्येक क्षण को लोकमंगल और युग निर्माण के लिए समर्पित किया। उन्होंने महिलाओं को आत्मविश्वास और आत्मबल के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी तथा परिवार को संस्कारों की पहली पाठशाला बनाने पर बल दिया। उन्होंने माताजी के व्यक्तित्व व कर्तृत्व को याद किया।
शाम को आयोजित सभा में जन्मशताब्दी समारोह के दलनायक एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने माताजी के जीवन और उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि माताजी ने अपना जीवन नारी जागरण, संस्कार निर्माण और समाजसेवा के लिए समर्पित किया। उनका जीवन साधना को सेवा से जोड़ने और परिवार को संस्कारों का केंद्र बनाने की प्रेरणा देता है।
सायंकालीन कार्यक्रम में गायत्री विद्यापीठ के बच्चों ने भावपूर्ण संगीत प्रस्तुत किया। बच्चों की प्रस्तुतियों में माताजी के प्रति श्रद्धा के साथ भारतीय संस्कृति और संस्कारों का संदेश दिखाई दिया। इसके बाद शांतिकुंज के युवा भाइयों ने भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान परिसर में मौजूद साधकों और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।



