ऋषिहुड़ विश्वविद्यालय, सोनीपत के 310 छात्र-छात्राओं के दल का गुरुकुल कांगड़ी परिसर मे शैक्षणिक भ्रमण हुआ सम्पन्न

कमल मिश्रा

हरिद्वार-04 अक्टूबर 2026 मानवीय व्यवहार के प्रति संवेदनशील एवं आचार-आचरण की शिक्षा युवाओं के जीवन मे बदलाव की एक सकारात्मक पहल हो सकती है। इस उददेश्य को लेकर गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के वैदिक परिवेश मे भारतीय शिक्षा दर्शन और आधुनिक एवं अकादमिक दृष्टि के जुडे अनुभवों को नजदीक से जानने एवं संवाद की जिज्ञासा लेकर ऋषिहुड़ विश्वविद्यालय, सोनीपत के 310 छात्र-छात्राओं के दल ने रविवार को गुरुकुल कांगड़ी परिसर मे अपना शैक्षणिक भ्रमण पूरा किया। शैक्षिक भ्रमण के दल का स्वागत सम्मान विश्वविद्यालय सभागार मे प्रो0 एल0पी0पुरोहित के संयोजन मे सम्पन्न हुआ।

कुलसचिव प्रो0 सत्यदेव निगमालंकार ने छात्र-छात्राओं के जीवन मे शैक्षिक भ्रमण एवं संवाद को प्रेरक कार्यक्रम बताया। कार्यक्रम के संयोजक एवं उपकुलसचिव डॉ0 श्वेतांक आर्य ने कहा कि युवाओं की चारित्रिक उन्नति, स्वभाव मे सरलता एवं वैचारिक प्रखरता के लिए युवाओं के अधिक संवाद करने पर बल दिया।

मुख्य वक्ता के रूप मे वैदिक एवं आर्य परम्पराओं के मूर्धन्य विद्वान, संस्कृत के आचार्य प्रो0 ब्रहमदेव विद्यालंकार ने छात्रों को गुरूकुलीय परपराओं की छात्र जीवन मे महनी आवश्यकताओं एवं समस्या समाधान मे उनकी उपादेयता पर मार्ग-दर्शन किया। अपने सम्बोधन मे प्रो0 ब्रहमदेव ने कहॉ कि भारत की शिक्षा व्यवस्था आचार-विचार, संस्कार, संस्कृति एवं आपसी समन्वय का जीवन्त उदाहरण एवं रीढ की हडडी का काम करता है। मुंशीराम से स्वामी श्रद्वानंद बनने तक की यात्रा गुरूकुलीय परम्पराओं की पोषक एवं संवाहक है। कहॉ कि कर्म मे वैचारिकता के आधार पर विभिन्नताये व्यक्ति के अस्तित्व की निर्माता है। भारतीय शिक्षा मातृवान, पितृवान तथा आचार्यवान के स्वरूप का गठन करती है जो मानव बनाने के लिए मनुर्भव को समआदर प्रदान करती है।

वर्तमान मे स्मित मच्छार की घटना मानवीय संवेदनाओं तथा वर्तमान शिक्षा-दीक्षा के लिए चिन्ता का विषय है। जिसके मूल मे आपसी भेदभाव मे बढती दूरी एक बडा कारण हो सकती है। उन्होने कहॉ कि शिक्षा व्यवस्था मे परिवर्तन करके विश्व के लिए चुनौती बन रहे वातावरणीय संकटों के समाधान प्राप्त किये जा सकते है, जिसके लिए युवा पीढी को भारतीय संस्कृति के मूल्यों को समझना जरूरी होगा। उन्होने युवा छात्र-छात्राओं के लिए इस प्रकार के संवाद एवं शैक्षिक कार्यक्रमों को आवश्यक बताया। कार्यक्रम का संचालन डॉ0 हिमान्शु पण्डित एवं डॉ0 शिखा द्वारा किया गया। ऋषिहुड विश्वविद्यालय की ओर से डॉ0 कनिष्का शर्मा, एकेडमिक डीन प्रो0 मनोज कन्नन, सहायक निदेशक प्रो0 माहित चौधरी, सस्टेक, वत्सला सिंह, न्यूटन ने गुरूकुल कांगडी के शिक्षकों को शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेटकर सम्मानित किया। कार्यक्रम मे डीन, एकेडमिक प्रो0 सीमा शर्मा, प्रो0 बिन्दु अरोडा, उप-कुलसचिव डॉ0 श्वेतांक आर्य, जनसम्पर्क अधिकारी डॉ0 शिवकुमार चौहान, डॉ0 विपुल भटट, नोडल सुरक्षा दुष्यन्त सिंह राणा, डॉ0 मनोज कुमार, मदनलाल जाट, प्रवीण कुमार, राजवीर सिंह, सहित विभिन्न संकायों के प्राध्यापक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे। स्वामी श्रद्वानंद के जीवन पर बनी डाक्यूमेन्टरी का भी छात्र-छात्राओं के लिए प्रसारण किया गया। वैदिक प्रार्थना एवं शान्ति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। ऋषिहुड विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों एवं छात्रों ने गुरूकुल के अनुभव को जीवनोप्योगी एवं समस्या समाधान का सबसे सटीक एवं व्यापक उपक्रम बताया।




