पवनपुत्र कॉलोनी में खुला ‘शिशु पालना घर’, नन्हों को मिलेगा सुरक्षा और स्नेह का सहारा
ग्राम प्रधान प्रमोद पाल ने किया लोकार्पण, कामकाजी माता-पिता के लिए बड़ी पहल

कमल मिश्रा

हरिद्वार। रावली महदूद के वार्ड नंबर 14 स्थित पवनपुत्र कॉलोनी में कामकाजी माता-पिता के छोटे बच्चों की सुरक्षित देखभाल के लिए स्थापित *‘शिशु पालना घर’ का भव्य लोकार्पण ग्राम प्रधान रावली महदूद श्री प्रमोद पाल ने किया।* अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम (SBMA) द्वारा संचालित किए जाने वाले इस केंद्र की शुरुआत को स्थानीय लोगों ने महत्वपूर्ण सामाजिक पहल बताया।

लोकार्पण समारोह में श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम के सचिव ज्ञान सिंह रावत, वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक एवं मानव संसाधन प्रबंधन ग्रीस डिमरी, अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के जिला प्रतिनिधि दीपक दीक्षित एवं अरविन्द नौटियाल ने सहभागिता की। वार्ड नंबर 14 की वार्ड सदस्य लक्ष्मी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भी कार्यक्रम में उपस्थित होकर इस पहल का स्वागत किया।
लोकार्पण के दौरान अतिथियों ने शिशु पालना घर की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया और बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली।* कार्यक्रम में बताया गया कि केंद्र का मुख्य उद्देश्य ऐसे कामकाजी माता-पिता को सुविधा उपलब्ध कराना है, जिन्हें रोजगार के दौरान अपने छोटे बच्चों की देखभाल के लिए सुरक्षित स्थान की आवश्यकता होती है।

शिशु पालना घर में बच्चों को सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण, पौष्टिक आहार, नियमित देखभाल और स्नेहपूर्ण माहौल उपलब्ध कराया जाएगा। बच्चों के स्वास्थ्य एवं विकास पर विशेष ध्यान देते हुए उनके वजन और ऊंचाई की नियमित निगरानी की जाएगी। आयु के अनुरूप खेल एवं गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के प्रारंभिक विकास को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम द्वारा केंद्र की दैनिक व्यवस्थाओं एवं बच्चों की देखरेख का संचालन किया जाएगा। संस्था का प्रयास रहेगा कि बच्चों को घर जैसा सुरक्षित और स्नेहपूर्ण वातावरण मिले, जबकि माता-पिता निश्चिंत होकर अपने रोजगार पर ध्यान दे सकें।
संस्था की योजना क्षेत्र में लगभग 20 शिशु पालना घर स्थापित करने की है। इसके माध्यम से अधिक से अधिक कामकाजी परिवारों के बच्चों को सुरक्षित देखभाल, पोषण और प्रारंभिक विकास की सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने कहा कि बच्चों की देखभाल के साथ-साथ कामकाजी परिवारों को सहयोग देना समाज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। शिशु पालना घर इस दिशा में एक व्यावहारिक और सराहनीय कदम है। स्थानीय ग्रामीणों ने भी पहल का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के लिए उपयोगी सुविधा बताया।



