हरिद्वार

विश्वकर्मा दिवस पर महिलाओं ने थामी सिलाई मशीनें, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया कदम

श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम (SBMA) एवं ऊषा इंटरनेशनल की पहल से महिलाओं को सिलाई, डिजिटल लिटरेसी और उद्यमिता का प्रशिक्षण

कमल मिश्रा 

जमालपुर कला/हरिद्वार। विश्वकर्मा दिवस के पावन अवसर पर महिलाओं को स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम (SBMA) द्वारा ऊषा इंटरनेशनल के सहयोग से समूह से जुड़ी महिलाओं के लिए सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत 30 महिलाओं को सिलाई, कटाई, छंटाई एवं विभिन्न प्रकार के पैटर्न तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहाश्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम (SBMA) एवं ऊषा इंटरनेशनल की पहल से महिलाओं को सिलाई, डिजिटल लिटरेसी और उद्यमिता का प्रशिक्षण है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ सरस सेंटर, जमालपुर कलां उर्फ नूरपुर पंजनहेड़ी में विश्वकर्मा दिवस के अवसर पर विधिवत मशीनों की पूजा-अर्चना के साथ हुआ। महिलाओं ने अपनी सिलाई मशीनों की पूजा कर नए उत्साह और संकल्प के साथ प्रशिक्षण कार्य प्रारंभ किया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें घर से ही स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना तथा उनकी आय में वृद्धि करना है।

कार्यक्रम में उषा इंटरनेशनल के परियोजना प्रबंधक श्री अभिषेक शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।* श्री शर्मा पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड में उषा इंटरनेशनल द्वारा संचालित आजीविका कार्यक्रमों के प्रमुख हैं। श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम की ओर से वरिष्ठ परियोजना प्रबंधक डॉ. हीरा बल्लभ पंत ने पुष्पगुच्छ भेंट कर श्री अभिषेक शर्मा का सम्मान एवं स्वागत किया

कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वागत स्वायत्त सहकारिता की अध्यक्ष  विमला जोशी ने की। इस अवसर पर समूह से जुड़ी 30 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।

मेरठ से पहुंची प्रशिक्षिका ने सिखाए सिलाई के आधुनिक गुर

महिलाओं को प्रशिक्षण देने के लिए मेरठ से श्रीमती अलका प्रजापति विशेष रूप से पहुंची हैं। उन्होंने महिलाओं को कटाई की बारीकियों के साथ कपड़ों की माप, कटिंग, पैटर्न निर्माण तथा विभिन्न डिजाइनों के अनुसार सिलाई की तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण एवं बाजार की मांग के अनुरूप परिधान तैयार करने के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने पर विशेष जोर दिया।

प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को केवल सिलाई तक सीमित न रहकर इसे व्यवसाय और आय के साधन के रूप में विकसित करने के लिए भी प्रेरित किया गया।

 डिजिटल लिटरेसी से बाजार तक पहुंचेगा महिलाओं का हुनर

प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिलाओं को डिजिटल लिटरेसी के बारे में भी जानकारी दी गई। प्रशिक्षिका श्रीमती अलका प्रजापति ने महिलाओं को ‘गौरैया’ ऐप के उपयोग की जानकारी देते हुए बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से महिलाएं आपस में जुड़ सकती हैं, अपने उत्पादों एवं कार्यों को साझा कर सकती हैं तथा नए-नए डिजाइन और पैटर्न प्राप्त कर सकती हैं।

उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में तकनीक का उपयोग महिलाओं को स्थानीय बाजार से आगे बढ़ाकर व्यापक बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। डिजिटल जानकारी और सिलाई के कौशल का संयोजन महिलाओं को छोटे स्तर के उद्यम को व्यवसाय के रूप में विकसित करने में मदद कर सकता है।

समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की राह

इस अवसर पर बताया गया कि प्रशिक्षण में शामिल महिलाएं सहयोग से गठित महिला समूहों से जुड़ी हुई हैं। इन समूहों के माध्यम से महिलाओं को सामूहिक रूप से आगे बढ़ने, कौशल विकास, आजीविका संवर्धन और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम (SBMA) महिलाओं को कौशल विकास एवं आजीविका के अवसरों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। सिलाई प्रशिक्षण इसी प्रयास की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसके माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी और बाजार की संभावनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

 उषा इंटरनेशनल का आजीविका सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण योगदान

कार्यक्रम में उषा इंटरनेशनल द्वारा महिलाओं की आजीविका एवं कौशल विकास के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी गई। उषा इंटरनेशनल महिलाओं को सिलाई एवं परिधान निर्माण जैसे कौशलों से जोड़कर उन्हें स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्य कर रहा है।

ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण के साथ-साथ आधुनिक सिलाई तकनीक, डिजाइन एवं पैटर्न, डिजिटल जानकारी तथा बाजारोन्मुखी कौशल प्रदान करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य महिलाओं को केवल प्रशिक्षण प्राप्त करने तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें अपने हुनर को आय एवं उद्यमिता के अवसर में बदलने के लिए सक्षम बनाना है।

कार्यक्रम के दौरान उषा इंटरनेशनल के परियोजना प्रबंधक अभिषेक शर्मा* ने कहा कि जब महिलाओं के हाथों में हुनर और उस हुनर को बाजार तक पहुंचाने का अवसर होता है, तो परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ पूरे समुदाय के विकास को गति मिलती है।

विश्वकर्मा दिवस पर मशीनों की पूजा के साथ शुरू हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं के लिए *’हुनर से रोजगार और रोजगार से आत्मनिर्भरता’* की दिशा में एक सार्थक कदम साबित होने की उम्मीद है।

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