आशुतोष विहार में धूम धाम से मनाया गया गणपति महोत्सव

उत्तराखंड उवाच ब्यूरो
हरिद्वार। आशुतोष विहार, निकट डिवाइन लाईट स्कूल, फुटबाल ग्राउण्ड जगजीतपुर में समाज सेवी उषा ने अपने निवास में गणपति की प्रतिमा स्थापित की तथा विधि विधान से स्थानीय निवासियों के साथ ढोल नगाड़ो से के बीच गंगा में विसर्जन किया। समस्त कालोनीवासियों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया।
इस अवसर पर उषा ने कहा कि गणपति विसर्जन का अर्थ है भगवान गणेश की प्रतिमा को जल में प्रवाहित करना। गणेश जी अपने भक्तों के घर दस दिन तक विराजमान होकर उनकी मनोकामना पूरी करते हैं और फिर कैलाश पर्वत पर अपने माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती के पास लौट जाते हैं। विसर्जन इस बात का प्रतीक है कि जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं है, सब कुछ परिवर्तनशील है।
राष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण समिति की पूर्व राष्ट्रीय सचिव रेखा नेगी ने कहा कि गणपति विसर्जन हमें यह सिखाता है कि जीवन में हर शुरुआत का एक अंत होता है और हर अंत एक नई शुरुआत का मार्ग खोलता है। बप्पा को विदा करते समय हम यही प्रार्थना करते हैं गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ। गणपति विसर्जन हमें सिखाता है कि भले ही रूप बदल जाए पर आस्था और प्रेम हमेशा हमारे साथ रहते हैं। बप्पा की विदाई केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन के चक्र का उत्सव है।




