बिहार के राघोपुर में नाव हादसे की खबर अत्यंत पीड़ादायक परमार्थ निकेतन ने व्यक्त की संवेदनायें
भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सुरक्षा व्यवस्था को सर्वाेच्च प्राथमिकता देना आवश्यक- स्वामी चिदानंद मुनि

कमल मिश्रा
ऋषिकेश, उत्तराखंड, 14 अक्टूबर। बिहार के राघोपुर में नाव पलटने की दुर्घटना अत्यंत हृदय विदारक है। परमार्थ पीठाधीश्वर, स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने गहरी संवेदनायें व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी दुर्घटना में जीवन की क्षति अत्यंत पीड़ादायक होती है। विशेषकर जब नन्हे बच्चों और परिवारों के जीवन पर संकट आने की खबरें सामने आती हैं, तो मन व्यथित हो उठता है। प्रत्येक जीवन अनमोल है और प्रत्येक परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करना समाज, प्रशासन और व्यवस्था की सामूहिक जिम्मेदारी है।

पूज्य स्वामी ने कहा कि दुःख की ऐसी घड़ी में सबसे पहली प्राथमिकता प्रभावित परिवारों को संबल प्रदान करना, घायलों को समय पर समुचित चिकित्सा उपलब्ध कराना तथा राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी बनाना होना चाहिए। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके दुःख की भरपाई संभव नहीं है, लेकिन संवेदनशील सहयोग, मानवीय सहायता और निरंतर साथ के माध्यम से उनके दुःख को बाँटने का प्रयास अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के कारणों की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए और यदि कहीं लापरवाही, सुरक्षा मानकों की अनदेखी अथवा जिम्मेदारियों के निर्वहन में चूक सामने आती है, तो नियमानुसार जवाबदेही तय कर आवश्यक कार्रवाई करना जरूरी है, ताकि ऐसे हादसों को टाला जा सके। साथ ही, भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्थाएँ विकसित करना भी आवश्यक है।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि नदियाँ हमारी संस्कृति, आस्था, आजीविका और जनजीवन का अभिन्न अंग हैं। देश के अनेक क्षेत्रों में नावें लोगों के आवागमन का प्रमुख साधन हैं। इसलिए नावों से होने वाली यात्रा को सुरक्षित बनाना हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक नाव की निर्धारित यात्री क्षमता का कड़ाई से पालन कराया जाए। क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने पर प्रभावी रोक हो। नावों की नियमित तकनीकी जाँच, उनकी स्थिति का सत्यापन, सुरक्षित संचालन और मौसम एवं नदी की परिस्थितियों के अनुरूप यात्रा की अनुमति सुनिश्चित की जाए। तेज बहाव, खराब मौसम अथवा अन्य जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में नाव संचालन को लेकर स्पष्ट नियम हों और उनका पालन अनिवार्य बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि नाव पर सवार प्रत्येक यात्री के लिए पर्याप्त एवं उचित आकार के जीवनरक्षक जैकेट उपलब्ध होना और उनका उपयोग सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। नाव चालकों एवं संचालकों को आपातकालीन परिस्थितियों में बचाव के प्रशिक्षण से जोड़ा जाए। इसके साथ ही, घाटों पर प्रशिक्षित बचाव दल, प्राथमिक उपचार, आवश्यक बचाव उपकरण और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि दुर्घटना की स्थिति में तत्काल सहायता पहुँचाई जा सके।
परमार्थ निकेतन की ओर से इस दुर्घटना से प्रभावित सभी परिवारों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना की गई। साथ ही, संबंधित प्रशासन से राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता देने, प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने और दुर्घटना के कारणों की जाँच कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह करते हुये कहा कि हर जीवन अनमोल है, हर परिवार की सुरक्षा आवश्यक है और किसी भी दुर्घटना के बाद संवेदना के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था में ठोस सुधार भी हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।





