सुरक्षित बचपन अभियान का शुभारंभ, 39 विद्यालयों में 5 हजार विद्यार्थियों को दी गई कानूनी जानकारी
जिला जज नरेंद्र दत्त ने किया अभियान का आगाज, पॉक्सो अधिनियम, साइबर सुरक्षा और व्यक्तिगत सुरक्षा के प्रति जागरूक हुए छात्र-छात्राएं

कमल मिश्रा
हरिद्वार। सुप्रीम कोर्ट एवं हाई कोर्ट के निर्देशों के क्रम में बच्चों की सुरक्षा, अधिकारों के संरक्षण तथा उन्हें कानूनी रूप से जागरूक बनाने के उद्देश्य से जनपद हरिद्वार में सुरक्षित बचपन अभियान का शुभारंभ किया गया। पुलिस मॉडर्न सीनियर सेकेंडरी स्कूल, बीएचईएल, हरिद्वार में जिला जज एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष नरेंद्र दत्त ने अभियान का विधिवत आगाज किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम, साइबर सुरक्षा, व्यक्तिगत सुरक्षा और विधिक अधिकारों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला जज नरेंद्र दत्त ने कहा कि वर्तमान समय में छात्र-छात्राओं को अपने कानूनी अधिकारों और सुरक्षा संबंधी प्रावधानों की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। आज बच्चे विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में जागरूकता ही उन्हें अपने अधिकारों की पहचान करने और विषम परिस्थितियों में उचित कदम उठाने में सक्षम बनाती है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की गंभीर या असुरक्षित स्थिति उत्पन्न होने पर विद्यार्थी अपने नजदीकी पुलिस थाने, साइबर सुरक्षा से संबंधित पुलिस इकाई अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एव बाल कल्याण समिति के माध्यम से सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि किसी भी अनुचित व्यवहार, शोषण अथवा साइबर अपराध की स्थिति में चुप रहने के बजाय विश्वसनीय वयस्क, अभिभावक, शिक्षक या संबंधित प्राधिकरण को अपनी बात बताना महत्वपूर्ण है। बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों का संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
39 विद्यालयों में न्यायिक अधिकारियों ने किया जागरूक
सुरक्षित बचपन अभियान के अंतर्गत जनपद के 39 विद्यालयों में न्यायिक अधिकारियों ने पहुंचकर छात्र-छात्राओं को पॉक्सो अधिनियम तथा बच्चों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। इस जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से लगभग 5,000 विद्यार्थियों को लाभान्वित किया गया।
विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान बच्चों को बताया गया कि पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत बाल यौन शोषण से संबंधित मामलों में किस प्रकार कानूनी संरक्षण प्राप्त किया जा सकता है, शिकायत कहां दर्ज कराई जा सकती है और किसी अप्रिय घटना अथवा असुरक्षित परिस्थिति में किससे संपर्क करना चाहिए। इसके साथ ही साइबर सुरक्षा, ऑनलाइन धोखाधड़ी, इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग तथा व्यक्तिगत सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर भी विद्यार्थियों को जागरूक किया गया।
अभियान का उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें इस बात से अवगत कराना है कि कानून उनकी सुरक्षा के लिए मौजूद है और आवश्यकता पड़ने पर वे संबंधित संस्थाओं से मदद ले सकते हैं।
लक्सर में भी विद्यार्थियों और मेडिकल एसोसिएशन को किया जागरूक
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव / जज सिमरनजीत कौर ने लक्सर स्थित होली क्रॉस पब्लिक स्कूल में छात्र-छात्राओं को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि सुरक्षित बचपन अभियान 26 से 31 अक्टूबर तक संचालित किया जाएगा। इस अवधि में बच्चों को विधिक अधिकारों, पॉक्सो अधिनियम, साइबर सुरक्षा तथा व्यक्तिगत सुरक्षा के संबंध में जानकारी प्रदान की जाएगी।
उन्होंने विद्यार्थियों को सुरक्षा के प्रति सजग रहने तथा किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर उचित माध्यम से सहायता लेने के लिए प्रेरित किया। अभियान के दौरान उन्होंने लक्सर मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ भी वार्ता की। इस दौरान प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री और उनके दुरुपयोग से जुड़े विषयों पर जागरूक किया गया।
उन्होंने मेडिकल स्टोर संचालकों से प्रतिबंधित दवाओं की अवैध बिक्री से बचने, दवाओं की बिक्री में लागू नियमों का पालन करने तथा स्वास्थ्य के प्रति हानिकारक दवाओं के अनधिकृत वितरण को रोकने में जिम्मेदारी निभाने की अपील की।
सुरक्षित बचपन के लिए जागरूकता जरूरी : सुनीता चौधरी
वरिष्ठ समाजसेविका एवं बाल कल्याण समिति की सदस्य सुनीता चौधरी ने कहा कि वर्तमान दौर में बालक-बालिकाओं का जागरूक और सुरक्षित होना अत्यंत आवश्यक है। समाज के सामने बच्चों के संरक्षण को लेकर गंभीर चुनौतियां हैं। बच्चों के साथ होने वाले शोषण की घटनाएं उनके जीवन, मानसिक स्थिति और भविष्य पर गहरा प्रभाव डाल सकती हैं।
उन्होंने कहा कि सुरक्षित बचपन अभियान बच्चों को उनके अधिकारों और कानून की जानकारी देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। जब बच्चों को यह पता होगा कि उनके साथ किसी प्रकार का अनुचित व्यवहार होने पर उन्हें कहां और किस प्रकार अपनी बात रखनी है, तो वे समय पर सहायता प्राप्त करने में अधिक सक्षम होंगे।
सुनीता चौधरी ने कहा कि बालक-बालिकाओं को पुलिस, बाल कल्याण समिति तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जैसी संस्थाओं की भूमिका के बारे में जानकारी देना आवश्यक है। इसके साथ ही अभिभावकों, शिक्षकों और समाज को भी बच्चों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए, ताकि प्रत्येक बच्चा भयमुक्त वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर सके और उसका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो।
अभियान में शिक्षा विभाग, बाल कल्याण समिति तथा एचजेएसपीयू के अधिकारियों सहित संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।





