हरिद्वार

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने हाथरस भगदड़ त्रासदी पर  संवेदना व्यक्त की

हाथरस भगदड़ में मारे गये लोगों की स्मृति में 121 फलदार पौधों की वाटिका के निर्माण का संकल्प

प्रधान संपादक कमल मिश्रा 

ऋषिकेश, 6 जुलाई।

हाथरस, उत्तरप्रदेश में एक धार्मिक सत्संग समागम में हुई भगदड़ त्रासदी पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुये कहा कि इस प्रकार की घटनायें दुर्भाग्यपूर्ण हैं। अनियंत्रित भीड़ और भगदड़ के परिणाम अक्सर चोटें और मौतों के रूप में सामने आते हैं जिस पर नियंत्रण करने की तत्काल आवश्यकता है।
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में हुई इस भगदड़ में पीड़ित हजारों लोगों की भीड़ का हिस्सा थे। धार्मिक उपदेश, सत्संग और अन्य आयोजन होने चाहिये परन्तु आने वाले श्रद्धालुओं के लिये व्यवस्थाओं का इंतजाम सुचारू रूप से होना चाहिये।
कहा जा रहा है कि आयोजकों के पास 80,000 लोगों के उपस्थित होने की अनुमति के बावजूद लगभग 2.5 लाख श्रद्धालु इस कार्यक्रम में एकत्रित हुये थे। यह बात संज्ञान में लेने की हैं कि श्रद्धालुओं में वृद्धजन, छोटे बच्चे और मातृ शक्ति अधिक संख्या में उपस्थित थे उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आयोजकों का प्रथम कर्तव्य हैं।

हाथरस भगदड़ में 121 लोगों की जान चली गई जो अव्यवस्था की बहुत बड़ी कमी को उजागर करती है। शासन व प्रशासन को कार्यक्रमों की स्वीकृति प्रदान करने से पूर्व विभिन्न उचित मानदंड़ों पर जांचपड़ताल करना जरूरी है क्योंकि एक छोटी से चूक इतने बड़े व भयानक परिणाम लेकर आती है जिसकी भरपाई न जाने कितने परिवारों को करनी होगी। आयोजन कोई भी हो, किसी भी प्रकार के आयोजन हो वहां पर संख्या बल पर नियंत्रण होना जरूरी है। साथ ही प्रवेश व निकास के मार्ग बड़े हो, पानी व शौचालयों की संख्या के हिसाब से उचित सुविधायें हो। व्यवस्था सम्भालने वालों की उचित संख्या हो। कार्यक्रम स्थल का उचित नक्शा; ब्लूप्रिंट स्थानीय प्रशासन के पास पहले से हो और प्रशासन द्वारा उसकी जांच भी की जाये। अग्निशामक, एम्बुलेंस जैसी सामान्य परन्तु जरूरी सुविधाओं की उचित व्यवस्था हो अन्यथा प्रशासन द्वारा इस प्रकार के बड़े आयोजनों की स्वीकृति ही नहीं देनी चाहिये। हम अक्सर देखते हैं कि घटनायें घटने पर कुछ दिनों तक समाचार व खबरों में बने रहने के बाद उस घटना पर शायद ही किसी का ध्यान जाता है।
कार्यक्रमों के आयोजकों के लिये उचित दिशानिर्देश हो ताकि आने वाले लोगों को ऐसे ही किसी की दया व किसी भी दशा पर न छोड़ा जायें। किसी के भोलेपन का फायदा न उठाया जाये क्योंकि यह सबसे बड़ा गुनाह है।
स्वामी  ने कहा कि ऐसे अव्यवस्थित आयोजनों से हमारे देश का नाम पूरे विश्व में बदनाम होता है। ऐसी घटनाओं पर सख्त कदम उठने चाहिये ताकि आगे हमें ऐसे दिन न देखने पड़े।

स्वामी  ने कहा कि उत्तरप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ जी, शासन व प्रशासन जिस निष्ठा के साथ त्वरीत कार्य कर रहे हैं वह धन्यवाद के पात्र हैं। जांच के पश्चात जो भी दोषी पाये जाते हैं उनके लिये कड़ी सजा का प्रावधान हो जो आगे के लिये एक नज़ीर बन सके। साथ ही हमारा निवेदन प्रशासन से की बड़े आयोजनों की स्वीकृति प्रदान करने से पूर्व भी निष्पक्ष जांचपडताल के बाद ही स्वीकृति प्रदान की जायें।
दूसरी बात यही भी है कि जो भी धार्मिक आयोजन व सत्संग हो वह भ्रामकता के आधार पर न हो। भोलेभाले लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ न किया जाये। इस विषय पर भी परदर्शिता की जरूरत है तथा आयोजन ऐेसा हो जिसमें भीड़ का आवेशपूर्ण स्वरूप देखने को न मिले।
परमार्थ निकेतन द्वारा हाथरस भगदड़ का शिकार हुये लोगों की आत्मा की शान्ति व घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिये विशेष यज्ञ किया गया। मृतकों के नाम पर 121 फलदार पौधों की वाटिका का रोपण किया जायेगा।

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