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जब घर-घर भगवान राम की अनुभूति होने लगे तो दीपावली और जब घर-घर भगवान कृष्ण और माता राधा की प्रेम भक्ति हिलोरे मारने लगे तो मानो अन्नकूट पर्व आ गया – महामंडलेश्वर श्याम दास महाराज

हरिद्वार ( वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानन्द)। भूपतवाला स्थित हरिद्वार के प्रसिद्ध प्राचीन श्री राम मंदिर में अन्नकूट पर्व उत्सव आश्रम के श्री महंत ज्ञान मणि प्रातः स्मरणीय  रामदास जी महाराज के पतित पावन सानिध्य में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर बोलते हुए महामंडलेश्वर अनंत विभूषित 1008 श्याम दास जी महाराज ने कहा जब भगवान राम की अनंत भक्ति इस हृदय में समा जाये और यह तन और मन इस शरीर का रोम रोम राम मय हो जाये तो मानो तभी दीपावली है और जब कृष्ण प्रेम की भक्ति माता राधा के प्रेम की अनंत भक्ति मन में हिलोरे मारने लगे तो मानो गोवर्धन पूजा और अन्नकूट उत्सव घर-घर मनाया जा रहा है भारत त्योहारों का देश है, जहाँ हर पर्व का अपना एक विशेषढ अर्थ और महत्व होता है। दीपावली के अगले दिन मनाया जाने वाला गोवर्धन पूजा तथा अन्नकूट पर्व (अंकुरण) भी इन्हीं में से एक प्रमुख पर्व है। यह पर्व कृषि, प्रकृति और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का उत्सव है। अन्नकूट या अंकुरण का अर्थ

‘अन्नकूट’ का अर्थ है — ‘अन्न का पर्वत’। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को विभिन्न प्रकार के व्यंजन अर्पित किए जाते हैं। गाँवों और ग्रामीण क्षेत्रों में लोग नए अनाज को अंकुरित कर पूजा करते हैं, जिसे अंकुरण पूजा कहा जाता है। यह हमारी धरती माता के प्रति आभार प्रकट करने का प्रतीक है, क्योंकि वही हमें अन्न प्रदान करती है। गोवर्धन पूजा की कथापुराणों के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र पूजा करने से रोका और उन्हें गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वर्षा इंद्र नहीं, बल्कि प्रकृति और गोवर्धन पर्वत के कारण होती है, जो हमें जल, अन्न और जीवन प्रदान करते हैं।इससे क्रोधित होकर इंद्र ने भयंकर वर्षा की, परंतु श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की। इसीलिए इस दिन गोवर्धन पूजा की जाती है।पूजा विधि और परंपरा

गोवर्धन पूजा के दिन लोग गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाते हैं। उसके चारों ओर दीप, फूल, मिठाई और अन्न चढ़ाया जाता है। फिर परिवार और समाज के लोग मिलकर ‘परिक्रमा’ करते हैं।

अन्नकूट के दिन भगवान को सैकड़ों प्रकार के पकवान — पूड़ी, कढ़ी, चावल, मिठाई आदि — अर्पित किए जाते हैं। यह भोग बाद में सबको प्रसाद रूप में बाँटा जाता है।

यह पर्व हमें सिखाता है कि प्रकृति की पूजा ही सच्ची पूजा है। हमें वर्षा, अन्न, जल, पर्वत और धरती की कद्र करनी चाहिए। गोवर्धन पूजा समाज में एकता, सहयोग और पर्यावरण के प्रति सम्मान की भावना को बढ़ाती है।गोवर्धन पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ मानव के संतुलित संबंध का प्रतीक है। अन्नकूट हमें याद दिलाता है कि अन्न ही जीवन है, और हमें हर दाने की कद्र करनी चाहिए। इस पर्व के माध्यम से हम भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश — “प्रकृति की रक्षा ही धर्म है” — को हृदय में उतारते हैं। इस अवसर पर महान टी ऋषि दास महाराज महंत शिवम दास महाराज श्री जानकी नाथ जी महाराज स्वामी महादेव दास महाराज परम पूज्य स्वामी बलराम दास जी महाराज परम पूज्य महंत डॉक्टर साधनानंद महाराज स्वामी हरिहरानंद महाराज स्वामी शंकारानंद महाराज साध्वी राधागिरी महाराज कोतवाल धर्मदास महाराज कोतवाल श्री रामदास महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष उपस्थित थे आयोजित विशाल भंडारे में सभी ने भोजन प्रसाद ग्रहण कर अनुकूल उत्सव तथा गोवर्धन पूजा में भाग लिया

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