आस्थाहरिद्वार

श्रीमद्भागवत कथा भगवान के प्रति भक्ति को गहरा कर व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति की राह पर ले जाती है.-श्रीमहंत बिष्णु दास

श्रवण झा 

हरिद्वार श्रीगुरु सेवक निवास उछाली आश्रम में जारी बीसवें गुरु स्मृति महोत्सव के तहत श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पांचवे दिन कथा व्यास आचार्य श्रीरविशंकर जी महाराज नैमिषारण्य यू.पी ने श्रद्वालुओं को गोवर्धन पूजा का वर्णन सुनाते हुए कहा कि इस धरा भगवान हमेशा राक्षसों का संहार करने के लिए अवतरित होते है। उन्होने बताया कि भगवान इन्द्र जब प्रकोप में थे,तब उन्होंने वर्षा करके कहर बरपाया। चारों ओर हाहाकार मच गई। गांव जलमग्न होने लगे तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उंगली पर उठा लिया। इससे गांव के सभी लोग गोवर्धन पर्वत के नीचे आ गए और वहां शरण ली। भगवान श्रीकृष्ण ने इन्द्र का मान नष्ट करके गिर्राज पूजा कराई थी। तब सभी बृजवासियों ने गोवर्धन पहुंचकर गोवर्धन पर्वत का पूजन किया और 56 भोग लगाया। उन्होंने कहा कि मन से नमन और मन से मनन करेंगे तो जिंदगी की सारी समस्याओं का हनन हो जाएगा।

पांचवे दिन की कथा का उछाली आश्रम के परमाध्यक्ष श्री महंत विष्णु दास महाराज ने कथाव्यास का पूजन कर कथा प्रारम्भ कराया। उन्होने कहा कि शनिवार को पांचवे दिन गंगा सप्तमी के अवसर 3 मई को श्री गुरु सेवक निवास उछाली आश्रम से हर की पैडी तक गंगा जी के जन्मोत्सव की भव्य शोभायात्रा निकाली जा रही है। श्री महंत विष्णु दास ने श्रीमद भागवत कथा श्रवण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कथा सुनने से व्यक्ति में आध्यात्मिक विकास, भक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। भागवत कथा सुनने से मन की शुद्धि होती है, पाप दूर होते हैं और व्यक्ति भगवान के करीब महसूस करता है।

उन्होने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा भगवान के प्रति भक्ति को गहरा करती है और व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति की राह पर ले जाती है। कलयुग में मोक्ष का रास्ता इसी से मिलता है। इस दौरान उन्होने श्रद्वालुओं से गंगा जन्मोत्सव की चर्चा करते हुए गंगा जी महिमा के बारे में बताते हुए गंगा स्वच्छता के प्रति जागरूक किया।इस मौके श्री रामानंदीय श्री वैष्णव मंडल हरिद्वार के कई संतगण, महन्त प्रेम दास,सहित बड़ी संख्या में कई वरिष्ठ संत मौजूद रहे। मुख्य जजमान श्रीमती नीलम अनिल मलिक श्रीमती गीतका अंकुर मलिक श्रीमती अंकित सिद्धार्थ चतुर्वेदी अभी अयान आर्थिक आर्थिव श्रीमती चांद बृजमोहन सेठ गुड़गांव, पुनीत दास, राघवेंद्र दास, के अलावा अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे

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