जीवन में संस्कार, सेवा और सत्संग को अपनाएं- पुण्डरीक गोस्वामी महाराज
धर्म और अध्यात्म के चेतना से ही आपका जीवन बेहतर हो सकता है-कुमार विश्वास

कमल मिश्रा
हरिद्वार। पवित्र हर की पैड़ी पर गंगा की लहरों के साथ अध्यात्म की प्रवाह जारी रहा। छठे दिन प्रख्यात कवि कथावाचक कुमार विश्वास,राज्यमंत्री ओम प्रकाश जमदग्नि जी भी पहुचे,जिन्होने व्यास गदद्ी का पूजन कर कथा व्यास से आर्शीवाद प्राप्त किया।
इस मौके पर प्रख्यात कवि कथाकार कुमार विश्वास ने कथा आयोजन के लिए श्री गंगा सभा का आभार जताते हुए कहा कि अगर अंदर और बाहर दोनो जगह उजाला चाहते हो तो धर्म के रास्ते पर चलना होगा। धर्म और अध्यात्म के चेतना से ही आपका जीवन बेहतर हो सकता है।

श्रीगंगा सभा महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने कथा आयोजन को सनातन संस्कृति के लिए जरूरी बताते हुए सभी के लिए कल्याण की कामना की। पवित्र गंगा के तट श्रीगंगा सभा के तत्वावधान में मन्माध्व गौडेष्वर वैष्णवाचार्य पुण्डरीक गोस्वामी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं,गोपी प्रेम और भक्तों के प्रति उनकी करुणा का भावपूर्ण वर्णन किया।उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं,बल्कि मानव जीवन को धर्म, भक्ति और सदाचार की ओर ले जाने वाला दिव्य मार्ग है। कथा में महाराज श्री ने पूतना वध, कालिया नाग दमन और गोवर्धन लीला का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान सदैव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है, तब भगवान विभिन्न रूपों में अवतरित होकर धर्म की स्थापना करते हैं। श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण करने मात्र से मनुष्य के जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मन में सकारात्मकता का संचार होता है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से जीवन में संस्कार, सेवा और सत्संग को अपनाने का आह्वान किया। कथा के बीच-बीच में भजनों की मधुर प्रस्तुति से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों से भावविभोर दिखाई दिए। कथा के समापन पर पुंडरीक गोस्वामी जी ने कहा कि कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण ही सबसे बड़ा साधन है। जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान का स्मरण करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और आत्मिक आनंद का वास होता है।
कथा श्रवण करने वालों में श्रीगंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम,उपाध्यक्ष हनुमंत झा,स्वागत मंत्री सिद्वार्थ चक्रपाणि,समाज कल्याण मंत्री विकास प्रधान,उज्जवल पण्डित,प्रचार मंत्री गोपाल प्रधान के अलावा श्रीगंगा सभा के सभी पदाधिकारियों के अलावा बड़ी संख्या में श्रद्वालु श्रोता मौजूद रहे।




