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चिन्मय महाविद्यालय में राज्य स्थापना रजत जयंती दिवस  बड़ी धूमधाम से मनाया गया

प्रधान संपादक कमल मिश्रा

हरिद्वार। चिन्मय डिग्री कॉलेज में उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर रजत जयंती समारोह धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम  का उद्घाटन मुख्य अतिथि संतोष कुमार गुप्ता  भेल जीएम एच आर,  आलोक शुक्ला सचिव चिन्मय महाविद्यालय  एवं  प्राचार्य डॉ आलोक अग्रवाल ने दीप प्रज्वलन कर  किया।

महाविद्यालय में रजत जयंती अवसर पर महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा पर्वतीय व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए जो की आकर्षण का केंद्र रहा

उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस पर महाविद्यालय के  शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं ने उत्तराखंड राज्य के स्थापना को लेकर अपने-अपने व्यक्तव्यों में अभिभाषित किया साथ ही छात्रा  ने गढ़वाली गीत पर सुंदर नृत्य प्रस्तुत कर उत्तराखंड राज्य की संस्कृति को उजागर किया।

महाविद्यालय में रजत जयंती अवसर पर महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा  नाना प्रकार के पर्वतीय व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए जो की आकर्षण का केंद्र रहा। छात्र छात्राओं द्वारा बनाए गए पहाड़ी व्यंजनों की  सभी ने सराहना की।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि संतोष कुमार गुप्ता ने सभी को उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस की बधाई देते हुए कहा कि इन 25 वर्षों में विकाश कार्य तेजी से हुआ है । जबकि प्रदेश में कई बार प्राकृतिक आपदाएं आ चुकी है  लेकिन फिर भी तत्कालीन सरकारों ने उत्तराखंड राज्य को मजबूती से खड़ा करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड  के विकास हेतु आम जन की सहभागिता जरूरी है तभी हमारा राज्य समृद्धशाली राज्य बन सकता है।

चिन्मय डिग्री कॉलेज के सचिव आलोक शुक्ला ने सभी प्रदेश वासियों  ओर समारोह में उपस्थित सभी को उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी  ओर उत्तराखंड राज्य की लड़ाई में शहीदों को नमन किया ।उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य शांत प्रिय प्रदेश है। उन्होंने कहा कि हम सभी को उत्तराखंड राज्य की शांति व्यवस्था को बनाए रखते हुए  राज्य को उन्नति की ओर अग्रसर करना है।

उत्तराखंड स्थापना  रजत जयंती  दिवस  पर कॉलेज के प्राचार्य डॉ आलोक अग्रवाल ने कहा कि उत्तराखंड राज्य को अस्तित्व में आए 25 बार पूर्ण हो चुके हैं उत्तराखंड राज्य इन 25 वर्षों में सतत विकास की ओर अग्रसर होते हुए एक मजबूत वट वृक्ष बनकर उभर रहा है उन्होंने कहा कि इन 25 वर्षों में उत्तराखंड राज्य में चौमुखी  विकास कार्य हुए  हैं। तत्कालीन राज्य सरकार ने भी  उत्तराखंड राज्य के को मजबूती प्रदान करने हेतु रोजगार, स्वास्थ्य, और गांव-गांव तक सड़कों तक जोड़ने का तथा प्रयास किया है।

इस अवसर पर प्रो आनंद शंकर सिंह ने  सभी को राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए सर्वप्रथम संसद में उत्तराखंड की नींव रखने वाले कुमाऊं केसरी बद्रीदत्त पांडेय को याद किया  जिन्होंने पहली पृथक उत्तराखंड राज्य की बात रखी । उन्होंने कहा कि  इसमें कोई शंका नहीं है कि हमारा उत्तराखंड राज्य  निरंतर गतिशील है अन्य राज्यों की अपेक्षा आज हमारे राज्य की जीडीपी दर भी बढ़ी है  कई तरह के आयोग भी बने है ।

लेकिन अभी भी गंभीर चिंतन की बात यह है कि आज भी हमारे पर्वतीय जिलों का पलायन नहीं रुक पाया है । एक गंभीर ओर सोचनीय विषय है जिस पर हमारी सरकार को गंभीरता से विचार करना होगा।

इस अवसर शिक्षिका प्रणिता भट्ट  ने  उत्तराखंड स्थापना दिवस पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज हम सभी प्रदेशवासी अपने राज्य का 25वा स्थापना दिवस मना रहे हैं जो हमारे राज्य के गौरव और संस्कृति का प्रतीक है 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग होकर भारत के 27 में और हिमालय की 11वीं उत्तराखंड राज्य के रूप में अस्तित्व में आया यह दिन उत्तराखंड वासियों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

उत्तराखंड हिमालय की गोद में  एक सुंदर राज्य है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व के लिए जाना जाता है उत्तराखंड की संस्कृति बहुत समृद्ध है जिसके पारंपरिक लोक नृत्य संगीत और त्योहार शामिल है उत्तराखंड में चार धाम यात्रा जैसे कोई तीर्थ स्थल है जो देश-विदेश से श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं इसलिए उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है उत्तराखंड से गंगा यमुना और सरस्वती जैसी पवित्र नदियों का उद्गम होता है।

इस भूमि पर पांडवों से लेकर कई राज्यों ने तब किया जो इसकी अधमित आध्यात्मिक महत्व को दर्शाता है  उत्तराखंड राज्य एक ऐसा प्रदेश है जो वैदिक काल से ही भारतीय जीवन में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है और आधुनिक काल में भी अपने अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य एवं  चार धाम सांस्कृतिक विविधताओं के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

देवों का जहां वास है नदियों का जहां उपकार है वादियां जहां के खूबसूरत है वही मेरा घर उत्तराखंड है।

मंच का सफल संचालन डॉ स्वाति शुक्ला ने किया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ मनीषा, डॉ पी के शर्मा, प्रो आनंद शंकर सिंह, डॉ ओम कांत डॉ मधु शर्मा ,डॉ स्वाति शुक्ला, डॉ ज्योति चौधरी, डॉ दीपिका  संतोष कुमार, डॉ निधि चौहान,  सुरभि गुप्ता राखी गुप्ता विक्रम सिंह नेगी अभिनव ध्यानी, राकेश चतुर्वेदी, राजेश कुमार ,  कमल मिश्रा, राजेश ठाकुर,  सौरभ गुप्ता, सुशील कुमार , जयप्रकाश ,   चंद्र सिंह, गौतम महतो आदि मौजूद रहे।

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