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गुरु के ज्ञान और अमृतवाणी से  भक्तों के तन और मन दोनों पावन होते है

 

हरिद्वार 13 जुलाई 2025( वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद )

श्यामपुर स्थित श्रीश्याम वैकुण्ठ धाम के परमाध्यक्ष 1008 श्याम सुंदर महाराज  के दिल्ली दरबार में पधारने पर भक्तजनों द्वारा बड़े ही भाव से गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया गया। कई हजार की संख्या में भक्त जनों ने परम पूज्य गुरुदेव 1008 श्री महंत श्याम सुंदर महाराज के पावन दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया हजारो भक्तजन बालाजी दरबार में पधारे हुए थे।

इस अवसर पर बोलते हुए परम पूज्य गुरुदेव तपस्वी ज्ञान मूर्ति महंत श्री श्याम सुंदर जी महाराज ने कहा परम पूज्य गुरुदेव श्री श्री 1008 पंडित राम गोपाल शर्मा अलवर वाले बाबा इस पृथ्वी लोक पर साक्षात ईश्वर की प्रतिमूर्ति थे ज्ञान का एक विशाल सूर्य थे उन्हीं के द्वारा प्रदत्त किये गये ज्ञान का प्रकाश श्री शिव हनुमान मंदिर सभापुर दरबार दिल्ली में तथा श्री श्याम वैकुंठ धाम श्यामपुर हरिद्वार में विद्यमान है करते सब गुरुदेव और बालाजी भगवान है हम तो सिर्फ निमित्त मात्र है जैसा उनकी प्रेरणा होती है उसके अनुरूप आपको छोटा-मोटा ज्ञान मार्ग प्रदान कर देते हैं यह हमारा ज्ञान नहीं हमारे गुरुदेव पंडित राम गोपाल शर्मा अलवर वाले बाबा जी द्वारा प्रदान ज्ञान है यह सब बालाजी भगवान के चरणों का प्रताप है हम तो उन्हीं के बताये मार्ग पर चलते हुए गुरु के बताये मार्ग का अनुसरण कर रहे हैं कहते हैं गुरु बिना ज्ञान नहीं गुरु बिना कल्याण नहीं और गुरु बिना गति नहीं गुरु ही वह सत्य का मार्ग है जो सीधे ईश्वर तक पहुंचता है हजारों बालाजी दरबार में पधारे भक्तजनों ने गुरुदेव के पावन दर्शन कर अपने जीवन को धन्य तथा कृतार्थ किया गुरुदेव ने सभी भक्तों को कल्याण की युक्ति बताते हुए कहा अगर जीवन में सफल होना है तो अपने आप को गंभीर बनाओ अनावश्यक बोलने पर नियंत्रण करें अगर कभी मुश्किल समय भी हो तो जल्दबाजी में कोई निर्णय न ले पहले उस पर गंभीरता पूर्वक विचार करें अगर कोई मार्ग मिले तो ठीक नहीं तो उसे भगवान पर छोड़ दें भगवान जो सोचेंगे वह आपके लियें सर्वोत्तम होगा क्योंकि हम तो मनुष्य हैं हमारी सोच छोटी हो सकती किंतु ईश्वर परमात्मा है उनकी सोच भी हमारी अंतरात्मा तक पहुंचेगी क्योंकि ना तो कभी सदैव सुख रहता है और ना ही ज्यादा देर दुख टिकता है जब कुछ ना सूझे तो भगवान श्री नारायण के मंदिर चले जाये और वहां उनके चेहरे को निहारने की बजाय उनके चरणों पर टकटकी बांधकर दृष्टि जमाये रखें आपको कुछ ही समय में संकट से बाहर जाने की युक्ति और उसे संकट से मुक्ति पाने का मार्ग दिखाई दे जायेगा बोलो श्री नारायण नारायण नारायण श्रीमन नारायण नारायण नारायण लक्ष्मी नारायण नारायण नारायण इस महामंत्र को मन ही मन जपते रहे यही युक्ति है और यही मुक्ति है

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