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पुन:अरण्य में देहरादून चिड़िया घर में कार्यशाला आयोजित की

 

देहरादून,उतराखंड उवाच 

वन्यजीवों के फ़ायदे के लिए उनके आवासों को जोड़ना और कचरे का समझदारी से इस्तेमाल और निपटान करने हेतु

‘पुनः अरण्य’ ने शनिवार को देहरादून चिड़ियाघर के साथ मिलकर स्कूली बच्चों के लिए एक कार्यशाला आयोजित की।

 

कार्यशाला का मकसद बच्चों को यह सिखाना था कि कैसे वन्यजीवों के आवासों को आपस में जोड़ा जाए ताकि वे बेहतर ढंग से पनप सकें, और साथ ही उन्हें ऐसी आदतों (जैसे कहीं भी कचरा फेंकना) से बचने के लिए प्रेरित करना था जिनसे वन्यजीवों को कई तरह से नुकसान पहुँच सकता है। यह वर्कशॉप 3 अक्टूबर, 2026 को सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक देहरादून चिड़ियाघर के ऑडिटोरियम में आयोजित की गई थी।

इस वर्कशॉप में तीन सरकारी स्कूलों – राजकीय इंटर कॉलेज किशनपुर, राजकीय इंटर कॉलेज गुनियाल गाँव और राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय, जोहरी गाँव – के लगभग 113 छात्रों ने हिस्सा लिया। उनके साथ उनके शिक्षक भी मौजूद थे।

वर्कशॉप में शामिल खास मेहमानों में भागवंतपुर के पार्षद श्री सुमेंद्र बोहरा और देहरादून चिड़ियाघर की रेंज ऑफिसर सुश्री दीक्षा भट्ट शामिल थीं।

वर्कशॉप की शुरुआत में, श्रीमती रितु सिंघल और सुश्री सरगुन सिंह ने आकर्षक गमलों में लगे पौधों के साथ मेहमानों और जजों का स्वागत किया। इसके बाद श्रीमती शेफाली राय ने ‘राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह, 2026’ के महत्व या थीम पर संक्षिप्त चर्चा की। वन्यजीवों के आवासों को जोड़ने की ज़रूरत के बारे में जानने के बाद, छात्र एक कॉम्पिटिटिव एक्टिविटी (प्रतियोगिता) में शामिल हुए। इसमें उन्होंने पाँच-पाँच के ग्रुप में काम किया और लोगों को जागरूक करने के लिए पोस्टर बनाए, जिसमें यह सुझाव दिया गया कि वन्यजीवों के आवासों के टुकड़ों में बँटने (fragmentation) को रोकने के लिए क्या किया जा सकता है।

इसके बाद जानी-मानी कहानीकार सुश्री अनुभा का एक छोटा सा कहानी-सत्र (storytelling session) हुआ। उन्होंने रणथंभौर नेशनल पार्क का अपना एक अनुभव सुनाया।

कहानी-सत्र के बाद दो एक्टिविटीज़ एक साथ हुईं। एक थी ‘कचरे से कलाकृतियाँ बनाना’ (Resurrecting Waste into Objects of Art)। इसका संचालन सुश्री वंदिता, शैली, गरिमा सेठी और अंजना मुखर्जी ने किया। उन्होंने छात्रों को बेकार बोतलों, मॉडलिंग क्ले, गोंद और ऐक्रेलिक पेंट्स का इस्तेमाल करके सुंदर शो-पीस बनाना सिखाया। दूसरे ग्रुप ने R.O. दीक्षा भट्ट और सरगुन सिंह की देखरेख में वाइल्डलाइफ़ से जुड़े MCQ वाला एक सवाल-जवाब का फ़ॉर्म भरा। स्टूडेंट्स ने बेकार बोतलों और डिब्बों से आकर्षक पेन होल्डर और शो-पीस बनाए।

रेंज ऑफ़िसर दीक्षा भट्ट ने स्टूडेंट्स को हमारे इकोसिस्टम में गिद्धों की अहम भूमिका के बारे में भी बताया की इसके उपरांत विजेताओं के नामों का ऐलान किया गया और मुख्य अतिथि सुमेंद्र बोहरा ने उन्हें इनाम दिए।

 

वहाँ मौजूद सभी लोगों को रिफ्रेशमेंट देने के साथ ही वर्कशॉप का समापन हुआ।

मौजूद लोगों में देहरादून ज़ू की रेंज ऑफ़िसर श्रीमती दीक्षा भट्ट और उनकी टीम, ‘पुनः अरण्य’ की फ़ाउंडर मेंबर श्रीमती शेफाली राय, ‘पुनः अरण्य’ की सुश्री रितु सिंघल, श्रीमती राज्यश्री रावत, श्रीमती अंजना मुखर्जी, सुश्री सरगुन सिंह, सुश्री वंदिता, श्रीमती अंकिता अर्जुन, सुश्री अनीता रॉय, कहानीकार सुश्री अनुभा, श्रीमती शैली, श्रीमती गरिमा सेठी, श्री अभिषेक बिश्नोई (जिन्होंने वर्कशॉप की रिकॉर्डिंग भी की), रीता सोनी और श्री धीरज सोनी शामिल थे।

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