अब नयी शिक्षा नीति में महाविद्यालय के विद्यार्थी भी ले सकेंगे ऑनर्स डिग्री, महाविद्यालय में सम्पन्न हुआ तीन दिवसीय दीक्षारम्भ कार्यक्रम

कमल मिश्रा
हरिद्वार 15 जुलाई 2026।

महाविद्यालय में नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास एवं उन्हें महाविद्यालय के शैक्षणिक, सांस्कृतिक तथा नैतिक वातावरण से परिचित कराने के उद्देश्य से महाविद्यालय की आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ द्वारा तीन दिवसीय दीक्षारंभ कार्यक्रम आयोजित किया गया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के छात्र अभिप्रेरण की भावना के अनुरूप 13 से 15 जुलाई तक आयोजित इस तीन दिवसीय दीक्षारम्भ कार्यक्रम के समापन सत्र में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो डॉ सुनील कुमार बत्रा ने कहा कि दीक्षारम्भ कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के नए परिवेश में सहज रूप से स्थापित करना तथा उनमें अनुशासन, नैतिक मूल्यों, आत्मविश्वास एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का विकास करना है। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य प्रो डॉ सुनील कुमार बत्रा ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि महाविद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने का केंद्र नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक संवेदनशीलता एवं राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित अध्ययन, अनुशासन, समयबद्धता तथा महाविद्यालय की विभिन्न शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया। प्रो बत्रा ने नव प्रवेशी विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि ‘दीक्षारम्भ’ केवल एक औपचारिक शुरुआत नहीं है, बल्कि यह आपके जीवन के एक ऐसे स्वर्णिम अध्याय का प्रारंभ है, जहाँ से आपके करियर और व्यक्तित्व को एक नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि विद्यालयी शिक्षा (Schooling) की सीमाओं से निकलकर महाविद्यालय की इस मुक्त और उत्तरदायी दुनिया में कदम रखना आपके जीवन का एक बड़ा पड़ाव है और यहाँ आपका उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना या परीक्षाओं में अंक लाना मात्र नहीं होना चाहिए, बल्कि ज्ञान का अर्जन करना, चरित्र का निर्माण करना और एक जिम्मेदार नागरिक बनना होना चाहिए।

कार्यक्रम में उपस्थित छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ संजय माहेश्वरी ने विद्यार्थियों को महाविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, आईसीटी सुविधाओं, खेलकूद, एन.एस.एस., पर्यावरण प्रकोष्ठ, रेड क्रॉस तथा विभिन्न प्रकोष्ठों एवं छात्र सहायता सेवाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। साथ ही उन्हें एंटी-रैगिंग नियमों, महिला सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं मानसिक कल्याण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी जागरूक किया गया।
डॉ माहेश्वरी ने बताया कि नयी शिक्षा नीति के अनुसार प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को सतत शिक्षा का सतत परिणाम भी प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि स्नातक का प्रथम वर्ष पूर्ण करने पर सर्टिफिकेट का लाभ, द्वितीय वर्ष पूर्ण होने पर डिप्लोमा का लाभ, तृतीय वर्ष पूर्ण कर लेने पर डिग्री का लाभ मिलेगा। जबकि सम्बंधित संकाय में चतुर्थ वर्ष पूर्ण करने पर सम्बंधित संकाय की ऑनर्स डिग्री तथा पंचम वर्ष पूर्ण कर लेने पर सम्बंधित विषय की स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त होगी।
इस अवसर पर उपस्थित राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो विनय थपलियाल ने विद्यार्थियों को जीवन कौशल, समय प्रबंधन, व्यक्तित्व विकास, प्रभावी संवाद कौशल, कैरियर नियोजन, उद्यमिता, नवाचार तथा डिजिटल शिक्षा के महत्व को समझाया। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में संवादात्मक सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया तथा उन्हें उच्च शिक्षा के विभिन्न अवसरों एवं भविष्य की संभावनाओं से भी अवगत कराया गया।
इस अवसर पर अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ नलिनी जैन ने नव प्रवेशी छात्र छात्राओं को गंगा की तरह निर्मल और अविरल बनने का सन्देश दिया। कार्यक्रम के अंत में डॉ पूर्णिमा सुन्दरियाल ने सफल कार्यक्रम के लिए सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार ने विश्वास व्यक्त किया कि यह दीक्षारंभ कार्यक्रम नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा की यात्रा का एक सशक्त एवं प्रेरणादायी प्रारंभ सिद्ध होगा तथा उन्हें जिम्मेदार, संवेदनशील एवं सफल नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करेगा। इस अवसर पर डॉ शिवकुमार चौहान, डॉ मनोज सोही, डॉ पल्लवी, वैभव बत्रा, डॉ मोना शर्मा, डॉ लता शर्मा, डॉ मीनाक्षी शर्मा,विनीत सक्सेना, डॉ गौरव अग्रवाल, अंजलि शर्मा, कार्यालय अधीक्षक मोहन चन्द्र पाण्डेय सहित अनेक नव प्रवेशी छात्र छात्राएं उपस्थित रहें।



