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परमार्थ निकेतन गंगा आरती में पधारे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

प्रधान संपादक कमल मिश्रा 

ऋषिकेश। भारत के गृह मंत्री अमित शाह परमार्थ निकेतन पधारे और पूज्य संतों के पावन सानिध्य में विश्व विख्यात परमार्थ निकेतन की दिव्य गंगा आरती में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द मुनि जी महाराज , अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्री महंत रविन्द्रपुरी एवं अन्य पूज्य संतों ने माननीय अमित शाह का माँ गंगा के पावन तट पर दिव्य रुद्राक्ष का पौधा, इलायची की दिव्य माला एवं अंगवस्त्र भेंट कर अभिनन्दन किया।

इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द मुनि महाराज ने कहा यह भूमि दिव्यता और भव्यता का संगम है। अमित शाह के नेतृत्व की भूरि-भूरि प्रशन्सा करते हुये कहा कि उन्होंने राष्ट्र को सुरक्षा का संविधान प्रदान किया। वर्तमान समय में राष्ट्र राजनीति से राष्ट्रनीति की ओर बढ़ रहा है। भारत में राष्ट्रनीति का नया संविधान लिखा ज रहा है। इस देश ने शान्तिभक्ति, शक्ति और आध्यात्मिक समृद्धि के मंत्र प्रदान किये हैं। यह धरती जीवन जीने का रास्ता दिखायी हैं।

साध्वी भगवती सरस्वती ने माननीय अमित शाह और सभी विशिष्ट अतिथियों का परमार्थ निकेेेतन माँ गंगा के पावन तट पर अभिनन्दन करते हुये कहा कि अमित शाह जी भारत की सुरक्षा, व्यवस्था और आस्था का अद्भुत संगम है। आपके माध्यम से जो सुरक्षा व्यवस्थायें राष्ट्र को प्राप्त हो रही है वह अद्भुत है। भारत माता को उनकी संस्कृति की रक्षा के लिये अमित शाह के रूप में आधुनिक हनुमान प्राप्त हुये हैं। माननीय मोदी और अमित शाह ने मिलकर भारत में अनेक ऐतिहासिक व विलक्षण कार्यों को सम्पादित किया है।

गंगा आरती में मुख्य रूप से योगगुरू पूज्य स्वामी रामदेव महाराज, पूज्य श्रीमंहत रविन्द्र पुरी महाराज, माननीय प्रदेश अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी महेन्द्र भट्ट, सांसद रमेश पोखरियाल निशंक, राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी, कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड सरकार धनसिंह रावत, वित्त, शहरी विकास एवं आवास, संसदीय कार्यमंत्री उत्तराखंड, प्रेमचन्द अग्रवाल, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, विधायक यमकेश्वर रेनू बिष्ट, संगठन महामंत्री अजय , महामंत्री आदित्य कोठारी, निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर कैलाशानन्द गिरि महाराज, ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलाायंस की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती, पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी ईश्वरदास महाराज, पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी दयाराम दास, पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी कृष्णाचार्य महारा, पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी असंगानन्द सरस्वती महाराज उपस्थित रहे।

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