हरिद्वार

उषा सिलाई स्कूल ने बदली सोमवीरी के जीवन की तस्वीर

सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास बदल देता है मनुष्य का जीवन - विमला

प्रधान संपादक कमल मिश्रा 

हरिद्वार। यदि सही मार्गदर्शन, अवसर और आत्मविश्वास मिल जाए, तो महिलाएं अपने जीवन की दिशा स्वयं बदल सकती हैं

यह कहानी है ग्राम नूरपुर पंजनहेड़ी की सोमवीरी की, जिन्होंने संघर्षों से निकलकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की।

सोमवीरी स्वयं सहायता समूह से जुड़ी तो थीं, लेकिन प्रारंभिक समय में उनके पास कोई विशेष कौशल या रोजगार का साधन नहीं था। आर्थिक स्थिति कमजोर थी और व्यवसाय करने का अनुभव भी नहीं था। सिलाई कार्य में रुचि होने के बावजूद उनके पास स्वयं की सिलाई मशीन नहीं थी। इसलिए उन्हें गांव के सरस केंद्र में जाकर सिलाई कार्य करना पड़ता था, जहां सीमित समय और संसाधनों के कारण उनकी मासिक आय केवल ₹1000 से ₹1500 तक ही हो पाती थी।

इसी दौरान श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम (SBMA) की टीम गांव में पहुंची और महिलाओं को *“उषा सिलाई स्कूल”* से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। संस्था की समूह प्रेरक विमला दीदी ने सोमवीरी को समझाया कि यदि वे प्रशिक्षण प्राप्त करें, तो घर बैठे सम्मानजनक रोजगार शुरू कर सकती हैं। परिवार के सहयोग और अपने दृढ़ संकल्प के साथ सोमवीरी ने इस अवसर को अपनाया।

पिछले वर्ष दिसंबर माह में आयोजित 9 दिवसीय उषा सिलाई स्कूल प्रशिक्षण में सोमवीरी ने पूरी लगन और मेहनत से भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने सिलाई मशीन की मरम्मत, पैटर्न कटिंग, कटाई-छंटाई एवं आधुनिक सिलाई तकनीकों को सीखा। प्रशिक्षण के बाद उन्हें सिलाई मशीन भी उपलब्ध कराई गई, जिसने उनके जीवन में एक नया मोड़ ला दिया।

अब सोमवीरी को बाहर जाकर कार्य करने की आवश्यकता नहीं रही। वे अपने घर पर ही फुल-टाइम सिलाई कार्य कर रही हैं। वर्तमान में वे सूट-सलवार, बच्चों के कपड़े, बैग, झोले एवं कपड़े की थैलियां तैयार कर रही हैं। उनके द्वारा तैयार किए गए वस्त्र गांव एवं कॉलोनी की महिलाओं को बेहद पसंद आ रहे हैं, जिसके कारण लगातार उनके काम की मांग बढ़ रही है।

आज सोमवीरी सिलाई कार्य के माध्यम से प्रतिमाह लगभग ₹6000 तक की आय अर्जित कर रही हैं और परिवार के खर्चों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। इससे उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है तथा परिवार और समाज में उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखा जाने लगा है। इसके अतिरिक्त, समूह प्रेरकों के सहयोग से उद्योग विभाग के माध्यम से उनका आर्टिजन कार्ड भी बनवाया गया है, जिससे भविष्य में वे छोटे ऋण लेकर अपने व्यवसाय का और अधिक विस्तार कर सकेंगी तथा मेलों एवं प्रदर्शनियों में अपने उत्पादों की बिक्री भी कर पाएंगी।

सोमवीरी आज केवल स्वयं आत्मनिर्भर नहीं बनी हैं, बल्कि आसपास की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं। वे अन्य महिलाओं को भी यह संदेश देती हैं कि यदि महिलाएं अपने हुनर पर विश्वास करें और अवसरों का सही उपयोग करें, तो वे घर की चारदीवारी से निकलकर सम्मान, पहचान और आर्थिक मजबूती हासिल कर सकती हैं।

आज सोमवीरी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि “उषा सिलाई स्कूल” केवल सिलाई सिखाने का माध्यम नहीं, बल्कि महिलाओं के सपनों को आत्मनिर्भरता में बदलने का एक सशक्त अभियान है।

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