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उत्तराखण्ड का लोक पर्व हरेला  नगर वन वैरागी कैम्प में  मनाया गया हर्षोल्लास के साथ,  प्रभारी मंत्री सतपाल महाराज ने रुद्राक्ष का पौधारोपण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया

लोक पर्व हरेला-2026 पर पर्यटन मंत्री एवं जनपद प्रभारी मंत्री सतपाल महाराज ने प्रदेशवासियों से प्रकृति संरक्षण को जनआंदोलन बनाने तथा प्रत्येक परिवार से प्रतिवर्ष एक पौधा लगाने का किया आह्वान

कमल मिश्रा

हरित हरिद्वार अभियान को सफल बनाने तथा जनपद को हरा-भरा बनाने के लिए हरेला पर्व पर 30 हजार पौधे रोपित करने का लक्ष्य

हरिद्वार, 16 जुलाई 2026। उत्तराखण्ड के लोक पर्व हरेला के पावन अवसर पर वन विभाग द्वारा नगर वन देवपुर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पर्यटन मंत्री एवं जनपद प्रभारी मंत्री सतपाल महाराज ने शिरकत करते हुए रुद्राक्ष का पौधारोपण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर उन्होंने लोक पर्व हरेला-2026 की प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण को जनआंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया।

प्रभारी एवं पर्यटन  मंत्री सतपाल महाराज  ने अपने संदेश में कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी आस्था, कृतज्ञता और संरक्षण के संकल्प का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति में वृक्ष, नदियां, पर्वत और वन सदैव पूजनीय रहे हैं। यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी तो मानव जीवन भी सुरक्षित, स्वस्थ एवं समृद्ध रहेगा।

पर्यटन मंत्री एवं जनपद प्रभारी मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, बढ़ता प्रदूषण तथा घटते वन क्षेत्र पूरी दुनिया के सामने गंभीर चुनौती बन चुके हैं। ऐसे समय में हरेला जैसे जन-जागरूकता अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। देवभूमि उत्तराखण्ड की प्राकृतिक संपदा, हिमालय, घने वन, पवित्र नदियां और समृद्ध जैव विविधता राज्य की पहचान होने के साथ-साथ पर्यटन एवं स्थानीय लोगों की आजीविका का भी प्रमुख आधार हैं। वन संरक्षण और पर्यटन विकास एक-दूसरे के पूरक हैं।

उन्होंने कहा कि हरिद्वार आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक दृष्टि से देश-विदेश के श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र है। यहां आने वाला प्रत्येक व्यक्ति स्वच्छ, हरित एवं सुंदर वातावरण का अनुभव करना चाहता है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि प्रत्येक परिवार प्रतिवर्ष कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए तथा उसके संरक्षण एवं संवर्धन का भी संकल्प ले। साथ ही जल स्रोतों के संरक्षण, हरियाली बढ़ाने और स्वच्छ पर्यावरण बनाए रखने में सक्रिय सहभागिता करें।

उन्होंने कहा कि आज लगाया गया प्रत्येक पौधा केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य, स्वच्छ वायु, शुद्ध जल एवं समृद्ध पर्यावरण का आधार है। समाज और सरकार के सामूहिक प्रयासों से ही हरित, स्वच्छ एवं समृद्ध उत्तराखण्ड के निर्माण का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

इस अवसर पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवीन्द्र पुरी महाराज ने लोक पर्व हरेला की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत की प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति में ऋषि-मुनियों के आश्रमों तथा मठ-मंदिरों में सदैव प्रकृति का संरक्षण किया गया है। वन विभाग द्वारा चलाया जा रहा पौधारोपण अभियान अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने भगवान दक्ष से प्रार्थना करते हुए कहा कि सभी लोग प्रतिदिन पौधा लगाएं, यदि प्रतिदिन संभव न हो तो कम से कम माह में एक पौधा अवश्य लगाएं।

उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु ने कहा है कि सभी वृक्षों में पीपल में उनका निवास है। इसलिए सभी लोगों को वट, पीपल एवं नीम जैसे अधिक ऑक्सीजन प्रदान करने वाले पौधों का रोपण करना चाहिए। जिस प्रकार हमारे पूर्वज इन पौधों का संरक्षण एवं संवर्धन करते थे, उसी प्रकार हमें भी प्रकृति संरक्षण के लिए पौधारोपण करना चाहिए।

इस अवसर पर गढ़वाल मंडल आयुक्त आनंद स्वरूप ने लोक पर्व हरेला की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पौधारोपण के साथ-साथ उसका संरक्षण करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जल स्रोतों के संरक्षण तथा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथियों को पौधे भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन एसडीओ वन विभाग पूनम कैंथोला ने किया।

इस अवसर पर मेयर नगर निगम  किरण जैसल, भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, राज्यमंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, डॉ. जयपाल सिंह चौहान, भाजपा नेता लव शर्मा, आशु चौधरी, प्रदेश उपाध्यक्ष युवा मोर्चा विक्रम भुल्लर, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, अपर मुख्य वन संरक्षक सुरेंद्र मेहरा, डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध, अपर जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार, उप जिलाधिकारी योगेश मेहरा सहित जनप्रतिनिधि, क्षेत्रीय नागरिक, जिलास्तरीय अधिकारी तथा वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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