वैश्विक सद्भाव के संदेश के साथ शांतिकुंज पहुँचा ब्राजीलियाई दल
प्रतिकुलपति डाॅ चिन्मय पण्ड्या ने कराया भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचय

कमल मिश्रा

हरिद्वार 16 जुलाई। भारत और ब्राजील के मध्य सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में ब्राजील का 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल देव संस्कृति विश्वविद्यालय एवं शांतिकुंज पहुँचा। दल सभी सदस्यों का भारतीय परंपरा के अनुरूप तिलक, अंगवस्त्र आदि कर आत्मीय स्वागत किया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति युवा आइकाॅन डॉ. चिन्मय पण्ड्या से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान डॉ. पण्ड्या ने भारतीय ज्ञान परंपरा, योग, अध्यात्म, संस्कृति एवं जीवन-मूल्यों पर आधारित शिक्षा प्रणाली की विशेषताओं से मेहमानों को परिचित कराया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल दर्शन वसुधैव कुटुम्बकम् है, जो संपूर्ण मानवता को एक परिवार मानने की प्रेरणा देता है। अंतरराष्ट्रीय संवाद वैश्विक सद्भाव, सांस्कृतिक समझ और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भ्रमण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय परिसर में संचालित शैक्षणिक, शोध, योग, व्यक्तित्व विकास एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का अवलोकन किया। साथ ही शांतिकुंज में संचालित आध्यात्मिक एवं रचनात्मक अभियानों तथा युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के विचारों और युग निर्माण आंदोलन की जानकारी प्राप्त की। विदेशी मेहमानों ने भारतीय जीवन-दर्शन, योग एवं मूल्यनिष्ठ शिक्षा के समन्वित स्वरूप की सराहना करते हुए इसे वैश्विक समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।
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विश्व शूटिंग पैराशूट चैम्पियनशिप के स्वर्ण पदक विजेता संजीव कुमार गिरी पहुंचे शांतिकुंज
प्रतिकुलपति डाॅ पण्ड्या से की शिष्टाचार भेंट, लिया आशीर्वाद
हरिद्वार 16 जुलाई।
विश्व शूटिंग पैराशूट चैम्पियनशिप में भारत के लिए दो स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाने वाले अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी श्री संजीव कुमार गिरी गायत्री तीर्थ शांतिकुंज पहुंचे। वे अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डाॅ. चिन्मय पण्ड्या से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर खेल, युवा चेतना, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।
प्रतिकुलपति डाॅ पण्ड्या ने श्री गिरी को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक शुभकामनाएं दी। उन्हांेने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का तिरंगा बुलंद करने वाले खिलाड़ी देश के प्रेरणास्त्रोत के समान हैं। उनकी सफलता यह सिद्ध करती है कि अनुशासन, निरंतर अभ्यास और अटूट संकल्प से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि खेल प्रतिस्पर्धा के साथ ही आत्मानुशासन, धैर्य, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र प्रेम जैसे गुणों के विकास का प्रभावी साधन भी है।
श्री संजीव कुमार गिरि ने अपनी उपलब्धि का श्रेय नियमित अभ्यास, मानसिक दृढ़ता, सकारात्मक सोच तथा परिवार और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे चुनौतियों से घबराने के बजाय उन्हें अवसर के रूप में स्वीकार करें तथा लक्ष्य के प्रति पूर्ण समर्पण के साथ आगे बढ़ें।
अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से श्री संजीव कुमार गिरि का अभिनंदन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य एवं आगामी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में निरंतर सफलता की मंगलकामनाएं व्यक्त की।




