राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने हिंदी के अध्ययन को मिली है एक नई दिशा- प्रो. प्रतिभा मेहता

कमल मिश्रा
हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के हिंदी विभाग तथा शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत हिन्दी भाषा-साहित्य अध्ययन की नई दिशाएं विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी कार्यक्रम आयोजित किया गया।

संगोष्ठी कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा ने किया इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हिंदी आत्मसम्मान की भाषा है। हिंदी में विपुल साहित्य रचा गया है और इसके गौरव को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने हिंदी के अध्ययन को नई दिशा प्रदान की है। अब अंतर-अनुशासनिक अध्ययन का समय है, जिसमें विज्ञान और साहित्य के समन्वय से भारत की ज्ञान परंपरा को और सुदृढ़ किया जा सकता है।
समविश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने कहा कि स्वामी दयानंद और आर्य समाज ने हिंदी को प्राण-प्रतिष्ठा प्रदान की। गुरुकुल के स्नातक हिंदी के ध्वजवाहक बने हैं। छात्रों को इस परंपरा की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। यही हिंदी की सबसे बड़ी सेवा होगी। शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ. सुहास ने कहा कि संगोष्ठियां बौद्धिक विचार-विमर्श का मंच प्रदान करती हैं। इनके माध्यम से विषय की नवीन प्रवृत्तियों की जानकारी मिलती है। शोध और नवाचार के लिए इस प्रकार का विमर्श आवश्यक है।
मुख्य वक्ता डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि हिंदी कौशल की भाषा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कारण हिंदी के अकादमिक उन्नयन के नए मार्ग खुले हैं। हिंदी अब रोजगार की भाषा के रूप में भी अपनी संभावनाएं बढ़ा रही है। विशिष्ट वक्ता डॉ. विपिन शर्मा ने कहा कि हिंदी साहित्य को समाज विज्ञान की विभिन्न दृष्टियों से देखने की आवश्यकता है। भूमंडलीकरण के बाद हिंदी साहित्य में विभिन्न विमर्शों ने नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. मुदिता अग्निहोत्री ने स्वागत वक्तव्य दिया। संचालन डॉ. अजित तोमर ने किया। महर्षि दयानंद सभागार, संस्कृत विभाग में आयोजित संगोष्ठी में देशभर से करीब 150 प्रतिभागियों ने हाईब्रिड माध्यम से सहभागिता की तथा शोध-पत्र प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर डॉ. निशा शर्मा, डॉ. निशा यादव, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. मोहनी कुमार, डॉ. रोशनलाल, डॉ. श्वेता अग्रवाल और डॉ. वंदना सिंह सहित शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।




