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श्रीमद भागवत कथा है  ज्ञान और मुक्ति का मार्ग –  आचार्य नीरज जोशी 

श्रीमद भागवत कथा के श्रवण मात्र से मिलती है कष्टों से मुक्ति -महामण्डलेश्वर स्वामी विशोकानन्द

कमल मिश्रा 

हरिद्वार । श्रीयंत्र मंदिर में चल रही श्रीमद भागवत कथा में  चतुर्थ दिन  श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आयोजन  हुआ। इस अवसर पर कथा व्यास आचार्य   नीरज जोशी ने  श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की पूरी कथा का व्याख्यान अपने मुखारबिंद से भक्तों  को सुनाया।

उन्होंने कहा श्रीमद भागवत केवल एक कथा नहीं है ।उन्होंने कहा कि भागवत कथा सुनने से भक्ति और ज्ञान का मनुष्य के जीवन में आता है। उन्होंने कहा कि  प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में एक बार अवश्य  भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। जो व्यक्ति भागवत कथा का आयोजन नहीं कर सकता है  उस व्यक्ति के कथा के  श्रवण  मात्र से ही जीवन धन्य हो जाता है । भागवत कथा ही है मुक्ति का मार्ग

इस अवसर पर निर्वाण पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी विशोकानन्द भारती राजगुरु महाराज ने कहा कि श्रीमद भागवत  के श्रवण मात्र से ही मनुष्य अपने समस्त कष्टों से मुक्ति पा लेता है। भागवत कथा का श्रवण सभी के लिया फलदाई होता है ।

विधायक आदेश चौहान ने कहा कि आज मुझे भी भागवत कथा में आने का अवसर प्राप्त हुआ है । उन्होंने  कहा कि कनखल शिव की नगरी,  गंगा किनारा और   आचार्य मुख से श्रीमद भागवत  कथा का श्रवण का महत्व  कई गुना  बढ़ जाता है ।

कथा  को शुरू करने से पूर्व कथा व्यास आचार्य नीरज जोशी  ने श्रीमद भागवत कथा आयोजक जोशी परिवार  एवं सभी भक्तों के लिए मंगलकामनाएं कि ।  श्री कृष्ण जन्मोत्सव का  विस्तार  से व्याख्यान करते हुए  कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, द्वापर युग में मथुरा के राजा कंस के अत्याचारों से पृथ्वी को मुक्त करने के लिए भगवान विष्णु ने भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि (12:00 बजे) में कारागार में माता देवकी और पिता वासुदेव के पुत्र के रूप में अवतार लिया था।

मथुरा के राजा कंस ने अपनी बहन देवकी का विवाह वासुदेव जी से बड़े धूमधाम से किया था। लेकिन विदाई के समय आकाशवाणी हुई कि— “देवकी का आठवां पुत्र ही कंस की मृत्यु का कारण बनेगा।” यह सुनकर कंस क्रोधित हो गया और उसने वासुदेव-देवकी को कारागार में डाल दिया। कारावास में  देवकी ने एक के बाद एक सात पुत्रों को जन्म दिया। हर बार कंस आता और यह सोचकर उनका वध कर देता कि यही उसकी मृत्यु का कारण होगा। सातों पुत्रों के वध से देवकी और वासुदेव अत्यंत व्याकुल थे।

आठवें पुत्र के रूप में स्वयं भगवान नारायण (श्रीकृष्ण) के प्रकट होने का समय आया, तो कारागार के पहरेदार सो गए, जंजीरें अपने आप खुल गईं। आधी रात को शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए हुए चतुर्भुज रूप में भगवान ने देवकी-वसुदेव को दर्शन दिए और फिर वे एक छोटे से साधारण बालक का रूप लेकर रोने लगे। इस प्रकार से भगवान श्री कृष्ण ने माता देवकी के गर्भ में  जन्म  लिया ।

 

आज के इस  अवसर पर मुख्य  रूप से  संतों में एक निर्वाण पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी विशोकानन्द भारती राजगुरु, विधायक  आदेश चौहान,  वरिष्ठ IAS अधिकारी हरि चंद सेमवाल, निदेशक लेखा एवं हकदारी प्रदीप गोयल, हिन्दी साहित्य के मूर्धन्य विद्वान  डॉ अशोक मिश्रा, ज्योतिषाचार्य डॉ आंनद बल्लभ जोशी, पवन पंत, शहर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ संजय शाह एवं डॉ मृदुल जोशी तथा डॉ  योगेश पांडे और प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार  दीपक नौटियाल की गरिमामयी उपस्थिति रही ।

 

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