सचिव कार्मिक की ओर से पेंशनर्स की सात मांगों पर बिन्दुवार विभागों की जिम्मेदारी की तय
उत्तराखंड उवाच ब्यूरो
हरिद्वार। गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन के साथ मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संपन्न त्रिपक्षीय बैठक का कार्यवृत्त शासन द्वारा जारी किया गया है। सचिव कार्मिक गिरधारी सिंह रावत की ओर से निर्गत कार्यवृत्त में पेंशनर्स की सात मांगों पर बिन्दुवार विभागों की जिम्मेदारी तय की गई है।
कार्यवृत्त के अनुसार पेंशनर्स की समस्याएं चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के अलावा वित्त एवं कार्मिक विभाग से संबंधित हैं जिनके समयबद्ध निराकरण के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली इस मीटिंग में शासन की ओर से राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रीना जोशी, अपर सचिव कार्मिक एवं सतर्कता गिरधारी सिंह रावत, अपर सचिव वित्त खजान चंद्र पाण्डेय, पेंशनर पक्ष से गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन के प्रदेश अध्यक्ष चौ ओमबीर सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बी पी चौहान, महामंत्री जे पी चाहर, विधिक सलाहकार सुखवंश सिंह, दिनेश जोशी, पी सी खंतवाल, मुख्यालय के अध्यक्ष शेर सिंह थापली, ललित मोहन उनियाल ने प्रतिभाग किया था।
प्रदेश गठन के बाद किसी भी पेंशनर संगठन के साथ हुई इस औपचारिक बैठक में गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन हरिद्वार के पदाधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिलाध्यक्ष बी पी चौहान और महामंत्री जे पी चाहर के साथ समस्याओं के प्रस्तुतीकरण में आर के जोशी ने सराहनीय योगदान दिया तो वहीं लीगल एडवाइजर सुखवंश सिंह ने अपनी प्रशासनिक कार्यों के अनुभव से मीटिंग को सार्थक बनाया।
गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन की ओर से गोल्डन कार्ड योजना और चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति व्यवस्था में व्यापक सुधार करने, 30जून 31 दिसम्बर को सेवानिवृत्त पेंशनर को नॉशनल इंक्रीमेंट देने संबंधी शासनादेश में संशोधन कर सेवानिवृत्ति के दिनांक से देने, पेंशनर के कोषागार या निवास के स्थान पर विभागीय अधिकारी को प्रशासनिक जिम्मेदारी देने, 17 दिसम्बर को जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में राष्ट्रीय पेंशनर्स दिवस मनाने, सभी कोषागारों में सुसज्जित पेंशनर भवन विकसित कर पेंशनर्स को पहचान पत्र जारी करने, राशिकरण की कटौती 12 तक करने, 65, 70 व 75 वर्ष पर पांच पांच प्रतिशत पेंशन वृद्धि और आठवें वेतन आयोग को पेंशन पुनरीक्षित करने एवं राजकीय पेंशनर्स की समस्याएं बताने की मांग उठाई थी जिनपर लगभग एक घंटे की चर्चा में शासन द्वारा सहमति जताई थी।



